दलहन-तिलहन सीधे किसानों से खरीदें नाफेड, एनसीसीएफ, बिचौलियों की भूमिका हो समाप्त : शाह

दलहन-तिलहन सीधे किसानों से खरीदें नाफेड, एनसीसीएफ, बिचौलियों की भूमिका हो समाप्त : शाह

दलहन-तिलहन सीधे किसानों से खरीदें नाफेड, एनसीसीएफ, बिचौलियों की भूमिका हो समाप्त : शाह
Modified Date: June 23, 2026 / 03:16 pm IST
Published Date: June 23, 2026 3:16 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) को दालों एवं तिलहनों की खरीद सीधे किसानों से करने का निर्देश दिया, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और इन वस्तुओं के आयात पर देश की निर्भरता घटाई जा सके।

नाफेड की चार पहल की शुरुआत के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शाह ने कहा कि हाल के वर्षों में दालों एवं तिलहनों का उत्पादन बढ़ा है लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाने के कारण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा, “खरीद में बिचौलियों की भूमिका खत्म करने की जरूरत है। अब समय आ गया है कि नाफेड और एनसीसीएफ सीधे किसानों से दाल और तिलहन खरीदें, ताकि लाभ सीधे किसानों को मिल सके।”

शाह ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो साल की समयसीमा तय करते हुए कहा कि इस अवधि में किसान सीधे इन सहकारी संस्थाओं को अपनी उपज बेच सकेंगे और उन्हें किसी बिचौलिये के बगैर भुगतान मिलेगा।

भारत हर साल अपनी घरेलू कमी को पूरा करने के लिए लगभग 60-70 लाख टन दाल और 1.5-1.6 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात करता है।

शाह ने नाफेड की वित्तीय स्थिति में सुधार की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2013 में यह सहकारी संस्था गंभीर संकट में थी और इसे बचाने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

हालांकि, नाफेड का वार्षिक कारोबार 500 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 30,000 करोड़ रुपये हो गया और इसकी पहुंच 76 लाख किसानों तक हो चुकी है।

सहकारिता मंत्री ने नाफेड को अब 50,000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखने को कहा।

इस अवसर पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार पहले से ही तीन प्रकार की दालों की खरीद लाभकारी कीमतों पर कर रही है।

नाफेड की तरफ से शुरू चार पहल में डिजिटल नीलामी मंच ‘नाफेक्स डॉट इन’ भी शामिल है, जो दालों एवं तिलहनों की पारदर्शी नीलामी सुनिश्चित करेगा। इससे पहले नाफेड निजी मंचों- एमजंक्शन, एनईएमएल और ईटेक के जरिये सालाना लगभग 20 लाख टन उपज की नीलामी करता था।

इसके अलावा ‘दृष्टि’ नामक डिजिटल स्टॉक प्रबंधन एवं ईआरपी मंच और वास्तविक समय में डेटा विश्लेषण करने वाले एक टूल को भी पेश किया गया जिससे भंडारण और स्टॉक प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। चौथी पहल ‘नाफेड कल्याण कोष’ है, जिसे किसानों के बच्चों के करियर समर्थन के लिए बनाया गया है।

नाफेड के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ अलग से बातचीत में कहा कि ये तीनों प्रौद्योगिकी मंच आपस में जुड़े हुए हैं और इससे पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

वहीं, एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक अनीस जोसेफ चंद्रा ने कहा कि एनसीसीएफ भी अपने ‘ई-समृद्धि’ मंच के तहत इसी तरह का नीलामी मंच शुरू करने की योजना बना रहा है।

कार्यक्रम में सहकारिता राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, नाफेड के चेयरमैन जेठाभाई अहीर और सहकारिता सचिव आशीष कुमार भूटानी भी मौजूद थे।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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