एनसीएलएटी ने बेलगोटेक्स की दिवाला अर्जी पर दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया

एनसीएलएटी ने बेलगोटेक्स की दिवाला अर्जी पर दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया

एनसीएलएटी ने बेलगोटेक्स की दिवाला अर्जी पर दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया
Modified Date: April 1, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: April 1, 2026 4:54 pm IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने पुनीत इंडिया के खिलाफ दायर बेलगोटेक्स इंडिया की दिवाला अर्जी को खारिज करने वाले एनसीएलटी के आदेश को निरस्त कर दिया है।

इसके साथ ही अपीलीय न्यायाधिकरण की दो-सदस्यीय पीठ ने मामले को फिर से सुनवाई के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की नयी दिल्ली पीठ को वापस भेज दिया। उसने सभी पक्षों को सुनकर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान और नरेश सलेचा की पीठ ने कहा कि एनसीएलटी ने चूक की तारीख तय करने और दिवाला संहिता की धारा 10ए के तहत आने वाली अवधि में देय राशि की गणना में ‘स्पष्ट कानूनी त्रुटि’ की है।

एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा, “हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि एनसीएलटी ने कानून की धारा 9 के तहत दायर आवेदन को खारिज करते हुए गंभीर त्रुटि की है। इसलिए यह आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता और इसे निरस्त किया जाता है।”

इसके साथ ही अपीलीय अधिकरण ने निर्देश दिया कि मामले को वापस एनसीएलटी को भेजा जाता है, जो सभी पक्षों को सुनने के बाद नए सिरे से आदेश पारित करेगा।

बेलगोटेक्स इंडिया कालीन एवं विनाइल फ्लोरिंग बनाने वाली कंपनी है और यह अफ्रीका स्थित बेलगोटेक्स इंटरनेशनल समूह का हिस्सा है। कंपनी ने 15 अक्टूबर, 2019 को पुनीत इंडिया को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में तीन वर्षों के लिए विशेष वितरक नियुक्त किया था।

समझौते के तहत, पुनीत इंडिया को माल की आपूर्ति के 40 दिन के भीतर (घरेलू गोदाम से) और आयात के बाद आपूर्ति के मामलों में 90 दिन के भीतर भुगतान करना था।

हालांकि, बेलगोटेक्स का कहना है कि कुल 2.41 करोड़ रुपये के बकाया में से पुनीत इंडिया ने केवल 95.71 लाख रुपये का भुगतान किया, जबकि करीब 1.45 करोड़ रुपये शेष रह गए। इसके अलावा कंपनी की तरफ से जारी चारों चेक भी बाउंस हो गए।

भुगतान न मिलने पर बेलगोटेक्स ने मई, 2020 में नोटिस जारी किया और परिचालन ऋणदाता के रूप में एनसीएलटी में आईबीसी की धारा 9 के तहत दिवाला याचिका दायर की थी।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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