नीति आयोग ने स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय कार्यबल का दिया प्रस्ताव

नीति आयोग ने स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय कार्यबल का दिया प्रस्ताव

नीति आयोग ने स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय कार्यबल का दिया प्रस्ताव
Modified Date: May 7, 2026 / 04:28 pm IST
Published Date: May 7, 2026 4:28 pm IST

नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) नीति आयोग ने देश में स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कार्यबल गठित करने की वकालत की है। साथ ही रचनात्मक और छात्र केंद्रित शिक्षा के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) को एकीकृत करने का सुझाव दिया है।

‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: समयगत विश्लेषण एवं गुणवत्ता सुधार के लिए नीति ढांचा’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में आयोग ने स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए 13 सिफारिशें दी हैं।

पांच शैक्षणिक सिफारिशों में शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन एवं सीखने में बुनियादी बदलाव, समग्र शिक्षा एवं छात्र कल्याण पर जोर, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल एकीकरण की पुनर्कल्पना, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को मजबूत करना और शैक्षणिक नवाचार में एआई का एकीकरण शामिल हैं।

इसके अलावा, आठ प्रणालीगत सिफारिशों में समग्र विद्यालयों एवं साक्ष्य-आधारित युक्तिकरण के माध्यम से विद्यालय संरचना में सुधार करना, विद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, शासन सुधार एवं प्रशासनिक क्षमता निर्माण करना, विद्यालय की गुणवत्ता पर राज्य व जिला स्तर पर कार्यबलों के जरिये ‘समाज के समग्र दृष्टिकोण’ को संस्थागत रूप देना तथा स्कूल प्रबंधन समितियों को सशक्त करना शामिल है।

अन्य प्रणालीगत सिफारिशों में शिक्षक तैनाती एवं पेशेवर विकास को बेहतर बनाना, डिजिटल व प्रसारण आधारित शिक्षण का विस्तार तथा समानता और समावेश को बढ़ावा देना शामिल हैं।

भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में 14.71 लाख स्कूल शामिल हैं जिनमें 24.69 करोड़ से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रणाली बन जाती है।

रिपोर्ट में पिछले दशक में हुई प्रगति पर विचार करते हुए 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पहुंच, अवसंरचना, समानता, समावेश, डिजिटल एकीकरण और सीखने के परिणामों जैसे प्रमुख आयामों पर व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

इसमें विशेष रूप से लड़कियों की भागीदारी और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के छात्रों के नामांकन में सुधार के साथ समानता और समावेश के क्षेत्र में उत्साहजनक प्रगति का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में वैश्विक महामारी के बाद विभिन्न कक्षाओं में सीखने के परिणामों में सुधार के संकेत भी दिए गए हैं। डेटा विश्लेषण और हितधारकों से परामर्श के आधार पर रिपोर्ट में प्रणालीगत और शैक्षणिक क्षेत्रों में 11 प्रमुख चुनौतियों की भी पहचान की गई है।

भाषा निहारिका रमण

रमण


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