तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती का रुख

तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती का रुख

तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती का रुख
Modified Date: July 20, 2023 / 09:56 pm IST
Published Date: July 20, 2023 9:56 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) विदेशों में तेजी के बीच दिल्ली बाजार में बृहस्पतिवार को तेल तिलहन कारोबार में मजबूती का रुख रहा। सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहने के अलावा सरसों, मूंगफली तेल- तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ), बिनौला और पामोलीन तेल कीमतों में पर्याप्त तेजी आई।

मलेशिया एक्सचेंज में चार प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज रात 4.5 प्रतिशत मजबूत बंद हुआ था और फिलहाल यहां 2.25 प्रतिशत की तेजी है।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि रूस का काला सागर से परिवहन के संबंध में यूक्रेन से जो समझौता था उसकी मियाद 18 जुलाई को खत्म हो गई और इस मार्ग से परिवहन समझौते का नवीनीकरण नहीं हुआ। इस घटना के बाद मलेशिया और शिकागो में तेल तिलहन बाजार तेज हो गया जिसके कारण देश में भी तेल तिलहन के भाव पयार्प्त रूप से मजबूत हो गये। एक से 20 जुलाई के दौरान मलेशिया का निर्यात 19 प्रतिशत बढ़ने के बाद सीपीओ में तो चार प्रतिशत की मजबूती आई है।

सूत्रों ने कहा कि इन्हीं कारणों से कहा जाता है कि आयात पर निर्भरता कहीं से उचित नहीं है और देश में तेल तिलहन उत्पादन बढ़ाना ही सही समाधान है।

उन्होंने कहा कि गुजरात में मूंगफली तेल तिलहन की कमी की वजह से वहां के एक प्रमुख ब्रांड ने 15 किग्रा के टिन में पैकिंग के स्थान पर अब छोटे पैक में मूंगफली तेल की पैकिंग शुरु कर दी है। यह मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में सुधार का मुख्य कारण है।

विदेशों में तेजी के असर से बिनौला तेल में भी सुधार आया लेकिन पुराना बिनौला बीज होने के कारण बिनौला तेल की गुणवत्ता ठीक नहीं है और उस तेल के रंग में गाढ़ापन है और अधिकांश तेल खाने लायक नहीं है। वहां प्रदेश सरकार को इस बात की निगरानी रखनी चाहिये कि बेजुबान मवेशियों को जो बिनौला खल दिया जा रहा है उसका गुणवत्ता कैसी है।

सूत्रों ने सरसों तेल तिलहन की तेजी का कारण बताते हुए कहा कि सरसों मजबूत किसानों के हाथों में है जो कम दाम पर बिकवाली नहीं करना चाहते। वैसे एक महीने पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से सरसों तिलहन का भाव 15 प्रतिशत कम था वह घटकर अब चार प्रतिशत के लगभग रह गया है लेकिन फिर भी सरसों की बिक्री कम है। इस कारण से सरसों तेल तिलहन में सुधार है।

शिकागो एक्सचेंज के मजबूत होने के कारण सोयाबीन तेल कीमतों में सुधार आया। लेकिन विदेशों में जितना दाम बढ़े हैं उस हिसाब से देश में दाम उतने नहीं बढ़े हैं। डी-आयल्ड केक (डीओसी) की मांग कम होने से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 5,500-5,550 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,275-7,325 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,700 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,835 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,785 -1,865 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,785 -1,895 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,350 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,350 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,650 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,650 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 4,950-5,045 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,715-4,810 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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