‘अन्य इस्पात सामग्री’ प्रावधान हटा, वाहन क्षेत्र 2025-26 में ‘कबाड़’ लक्ष्य से 70 प्रतिशत पीछे

‘अन्य इस्पात सामग्री’ प्रावधान हटा, वाहन क्षेत्र 2025-26 में ‘कबाड़’ लक्ष्य से 70 प्रतिशत पीछे

‘अन्य इस्पात सामग्री’ प्रावधान हटा, वाहन क्षेत्र 2025-26 में ‘कबाड़’ लक्ष्य से 70 प्रतिशत पीछे
Modified Date: May 10, 2026 / 10:42 am IST
Published Date: May 10, 2026 10:42 am IST

नयी दिल्ली, 10 मई (भाषा) भारत की वाहन कंपनियां वित्त वर्ष 2025-26 में वाहन कबाड़ (स्क्रैप) से जुड़े इस्पात समतुल्य दायित्वों को पूरा करने में करीब 70 प्रतिशत पीछे रही हैं। उद्योग जगत के अधिकारियों ने इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय की ‘अव्यावहारिक नीति’ को जिम्मेदार ठहराया है, जिसके कारण पूरा वाहन उद्योग नियमों का अनुपालन नहीं कर सका।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी, 2025 में ‘पर्यावरण संरक्षण (वाहन को चलाने की अवधि की समाप्ति) नियम, 2025’ अधिसूचित किए थे, जो एक अप्रैल, 2025 से लागू हुए। इन नियमों के तहत वाहन विनिर्माताओं को विस्तारित उत्पादक दायित्व (ईपीआर) के तहत स्क्रैप किए गए पुराने वाहन या पंजीकृत कबाड़ केंद्रों पर प्रसंस्कृज अन्य इस्पात कबाड़ से प्राप्त इस्पात के आधार पर दायित्व पूरा करना था।

हालांकि, मंत्रालय ने 27 मार्च, 2026 को जारी संशोधन के मसौदे में ‘अन्य इस्पात स्क्रैप सामग्री’ के प्रावधान को हटा दिया। इसके बाद केवल पुराने वाहनों को कबाड़ करने से प्राप्त इस्पात को ही ईपीआर प्रमाणपत्र के लिए मान्य किया गया।

नियमों के अनुसार, वाहन विनिर्माताओं को 15-20 वर्ष पुराने निजी और वाणिज्यिक वाहनों को कबाड़ कराना अनिवार्य किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनियों को वर्ष 2005-06 में बेचे गए निजी वाहनों तथा 2010-11 में बेचे गए वाणिज्यिक वाहनों के इस्पात समतुल्य का कम से कम आठ प्रतिशत कबाड़ में बदलना था।

इसका अर्थ था कि 2025-26 में कुल 95.2 लाख वाहन फिटनेस परीक्षण के लिए पात्र थे, जिनमें से 7.62 लाख वाहनों को कबाड़ किया जाना आवश्यक था। लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कबाड़ केंद्रों पर केवल 2.42 लाख पुराने वाहन ही पहुंचे। इस तरह लगभग 5.2 लाख वाहनों की कमी रह गई।

उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “पूरे वाहन उद्योग में लगभग 70 प्रतिशत की कमी रही।”

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मार्च, 2026 के संशोधन के बाद ‘अन्य इस्पात स्क्रैप’ को हटाने से स्थिति और कठिन हो गई। उन्होंने कहा, “ज्यादातर वाहन विनिर्माताओं ने वाहन को कबाड़ करने और अन्य स्रोतों से इस्पात स्क्रैप दोनों के जरिये लक्ष्य पूरा करने की योजना बनाई थी। लेकिन यह प्रावधान हटने के बाद लक्ष्य हासिल करना लगभग असंभव हो गया।”

उद्योग के एक अन्य अधिकारी ने नीति को ‘अव्यावहारिक’ बताते हुए कहा कि कबाड़ केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में पुराने वाहन नहीं आ रहे हैं, जिससे उद्योग लक्ष्य से काफी पीछे रह गया।

वाहन विनिर्माताओं के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने भी मंत्रालय को पत्र लिखकर ईपीआर लक्ष्य पूरे करने के लिए पुराने वाहनों की सीमित उपलब्धता पर चिंता जताई थी। सियाम ने यह भी कहा था कि स्वचालित परीक्षण केंद्रों से बहुत कम संख्या में पुराने वाहन स्क्रैपिंग के लिए आ रहे हैं। संगठन ने सुझाव दिया था कि शुरुआती वर्षों में अन्य वाहन इस्पात स्क्रैप के उपयोग की अनुमति दी जाए और धीरे-धीरे पूर्ण व्यवस्था लागू की जाए।

उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि पुराने वाहनों के अलावा अन्य इस्पात स्क्रैप को शामिल किए बिना ईपीआर लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि हर पांच साल के चक्र के बाद लक्ष्य और बढ़ेंगे, जिससे कमी और अधिक हो सकती है।

नियमों के अनुसार, आठ प्रतिशत का लक्ष्य वर्ष 2029-30 तक जारी रहेगा। इसके बाद 2030-31 से 2034-35 तक इसे 13 प्रतिशत और 2035-36 से आगे 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उद्योग जगत ने नीति की समीक्षा की मांग की है।

भाषा अजय अजय

अजय


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