‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में मदद कर सकते हैं पेंशन कोष : सीईए
'विकसित भारत' के लक्ष्य में मदद कर सकते हैं पेंशन कोष : सीईए
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि पेंशन बचत भारत के बुनियादी ढांचे के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती है और ‘विकसित भारत’ की दिशा में देश की यात्रा को बल दे सकती है, साथ ही यह दीर्घकालिक देनदारियों के अनुरूप रिटर्न भी प्रदान कर सकती है।
पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि एक गहरा और सुशासित पेंशन कोष विकासोन्मुख निवेश को बढ़ावा देकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकता है, जबकि यह अंशधारकों के लिए देनदारी-आधारित प्रतिफल भी सुनिश्चित करता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर पेंशन कोषों को वित्तपोषण (फंडिंग) संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, विशेषकर अतीत में जब कम ब्याज दरों के दौर ने निवेशकों को जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों की ओर रुख करने के लिए मजबूर किया
उन्होंने कहा, “पश्चिमी देशों के पेंशन कोष लंबे समय से वित्तपोषण अंतर से जूझते रहे हैं, हालांकि ब्याज दरें शून्य स्तर के वातावरण से बाहर आने के बाद यह अंतर कुछ कम हुआ है, लेकिन अब एक सूक्ष्म जोखिम उभरा है।”
नागेश्वरन ने कहा कि पेंशन कोष तेजी से जोखिमपूर्ण, कम नकदी और व्यापक आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।
सोने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति भारत जैसे देश के लिए भुगतान संतुलन पर असर डाल सकती है, जिसे दीर्घकालिक देनदारियों वाले कोषों को ध्यान में रखना चाहिए।
नागेश्वरन ने वित्तीय बाजारों में लघु अवधि के निवेशकों के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई और कहा कि परंपरागत रूप से दीर्घकालिक निवेशकों का निवेश भी अब सिकुड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पेंशन प्रणाली पेंशन दायित्वों की कीमत पर अधिक रिटर्न की होड़ नहीं अपना सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी विकसित देश का मूल्यांकन केवल आर्थिक उत्पादन से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि वह अपने वरिष्ठ नागरिकों को कितनी वित्तीय सुरक्षा और गरिमा प्रदान करता है।
सीईए ने कहा, “विकसित भारत केवल राष्ट्रीय आय का आंकड़ा नहीं है। कोई देश उच्च उत्पादन हासिल कर सकता है, लेकिन फिर भी अपने बुजुर्गों को असुरक्षित छोड़ सकता है। किसी विकसित समाज का असली पैमाना यह है कि क्या वृद्धावस्था में सुरक्षा और गरिमा सभी के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध है।”
भाषा योगेश अजय
अजय

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