प्रल्हाद जोशी का दावोस में वैश्विक निवेशकों से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अवसर तलाशने का अनुरोध

प्रल्हाद जोशी का दावोस में वैश्विक निवेशकों से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अवसर तलाशने का अनुरोध

प्रल्हाद जोशी का दावोस में वैश्विक निवेशकों से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अवसर तलाशने का अनुरोध
Modified Date: January 22, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: January 22, 2026 9:32 pm IST

नयी दिल्ली/ दावोस, 22 जनवरी (भाषा) केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बृहस्पतिवार को वैश्विक निवेशकों से भारत के घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कारोबारी अवसर तलाशने का आग्रह किया।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की दावोस में आयोजित सालाना बैठक के दौरान जोशी ने भारत को स्वच्छ ऊर्जा निवेश के लिए एक स्थिर और भविष्य के लिए तैयार गंतव्य के रूप में पेश किया।

यहां जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, जोशी ने कहा कि भारत दिसंबर 2025 तक 267 गीगावाट स्वच्छ ईंधन पर आधारित क्षमता स्थापित कर चुका है और 2030 के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

बैठक के दौरान विभिन्न सत्रों और निवेशक बैठकों में भाग लेते हुए जोशी ने कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और नीतिगत स्तर पर स्थिरता के साथ निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।

उन्होंने द्विपक्षीय बैठकों में वैश्विक निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों के साथ हरित हाइड्रोजन से जुड़ी अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा एवं बैटरी भंडारण परियोजनाओं और ग्रिड आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की।

मंत्री ने बड़े पैमाने पर परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक पूंजी और मिश्रित वित्त ढांचे को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

बयान के मुताबिक, भारत ने 2026 के मंच का उपयोग वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रत्यक्ष निवेश प्रस्ताव रखने के लिए किया और खुद को दुनिया के सबसे बड़े एवं निवेश के लिए तैयार स्वच्छ ऊर्जा बाजारों में से एक के रूप में पेश किया, जहां 2030 तक अनुमानित 300-350 अरब अमेरिकी डॉलर पूंजी की जरूरत होगी।

जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी मांग, नीतिगत स्पष्टता, मजबूत विनिर्माण आधार और राज्यों के स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन जैसे तत्व मौजूद हैं, जो दीर्घकालिक वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने ऊर्जा बदलाव में राज्यों की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित कई राज्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सौर एवं भंडारण परियोजनाएं लागू कर रहे हैं और हरित हाइड्रोजन विकास के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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