एलएनजी, अन्य ईंधन की विभिन्न देशों से खरीद ने भारत को संकट से बचाया: एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी
एलएनजी, अन्य ईंधन की विभिन्न देशों से खरीद ने भारत को संकट से बचाया: एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने एलएनजी एवं अन्य ईंधन की खरीद के लिए विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल किया जिससे उसे संकट से निपटने में मदद मिली। एस एंड पी ग्लोबल एनर्जी के विशेषज्ञों ने मंगलवार को यह बात कही।
विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आवाजाही बंद होने से वैश्विल एलएनजी आपूर्ति करीब 17 प्रतिशत बाधित हुई। हालांकि, विश्व के चौथे सबसे बड़े एलएनजी खरीदार भारत के ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला को शामिल कर आपूर्ति स्रोतों का सफलतापूर्वक विस्तार करने से एलएनजी आयात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा। इससे अप्रैल और मई, 2026 में सालाना आधार पर इसमें क्रमश: पांच प्रतिशत और दो प्रतिशत की ही कमी आई।
एसएंडपी की इकाई एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के साथ होर्मुज के दोबारा खुलने से ऊर्जा के प्रवाह में सुधार और बाजार की धारणा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार के सामान्य होने और रणनीतिक भंडार के स्तर को फिर से भरने में समय लगेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये घटनाक्रम बताता है कि विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखला, मजबूत बुनियादी ढांचा और रणनीतिक स्रोत तक पहुंच महत्वपूर्ण हैं। खोज एवं उत्पादन बाजार, एलएनजी व्यापार एवं समुद्री लॉजिस्टिक के क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता ही लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात बनकर उभरी है।
शोध और परामर्श सेवाएं देने वाली एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने कहा, ‘‘भारत के एलएनजी समेत ईंधन बाजार ने मजबूती दिखाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक एलएनजी आपूर्ति करीब 17 प्रतिशत बाधित हुई। हालांकि, विश्व के चौथे सबसे बड़े एलएनजी खरीदार भारत ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाया।’’
ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला को शामिल कर आपूर्ति स्रोतों का सफलतापूर्वक विस्तार करने से भारत के एलएनजी आयात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा।
इसी तरह, भारत ने कच्चे तेल के मामले में रूस के अलावा वेनेजुएला और अमेरिका समेत अन्य देशों से भी खरीद की है।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के प्रधान शोध विश्लेषक जोहान उतामा ने कहा, “उम्मीद है कि भविष्य में आने वाली रुकावटों को कम करने के लिए भारत एलएनजी खरीद के अलग-अलग तरीकों में से कुछ को बनाए रखेगा जिससे उसकी लंबी अवधि की खरीद रणनीतियों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के चलते खाड़ी क्षेत्र में तरल ईंधन उत्पादन में प्रतिदिन 1.5 करोड़ बैरल की कमी आई। हालांकि, चीन और जापान द्वारा कच्चे तेल का आयात तेजी से घटाने और अमेरिका से अधिक निर्यात सहित आक्रामक भंडार और वैश्विक स्तर पर मांग प्रबंधन के कारण कीमत में उतार-चढ़ाव आश्चर्य ढंग से सीमित रहा।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के उपाध्यक्ष एवं शोध प्रमुख (तेल बाजार, ऊर्जा एवं मोबिलिटी) जिम बुरखर्द ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी तौर पर बंद होना, इतिहास में तेल आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा थी। यह बाधा अब भी है लेकिन कीमतों की सीमित प्रतिक्रिया सबसे आश्चर्य में डालने वाली है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति और उत्पादन में सुधार होता भी है तो इसमें समय लगेगा और जून-जुलाई तक दुनियाभर में तेल भंडार में कमी बनी रहेगी। इसका मतलब है कि भंडार के और निचले स्तर पर आने से कीमतें बढ़ने का दबाव लौट सकता है।”
भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि तेल खोज एवं उत्पादन क्षेत्र में मजबूती भारत की रणनीतिक अनिवार्यता बन गया है। वैश्विक उत्पादन बाजार तेजी से संसाधान सुरक्षा, पोर्टफोलियो विविधीकरण और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा अब बुनियादी तौर पर खोज एवं उत्पादन पहुंच और वैश्विक पोर्टफोलियो विविधीकरण से जुड़ा है।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के कार्यकारी निदेशक (खोज एवं उत्पादन) निक शर्मा ने कहा, “आगे चलकर, मौजूदा माहौल वैश्विक और भारतीय खोज एवं उत्पादन क्षेत्रों दोनों के लिए एक स्पष्ट दिशा परिवर्तन को मजबूत करता है। इसमें मजबूत, मूल्य का मुख्य पैमाना बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ बड़े पैमाने या लागत कम करने के बजाय स्थिर संसाधनों तक पहुंच, परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर और विविधीकृत आपूर्ति पोर्टफोलियो को अधिक महत्व दिया जा रहा है।”
भाषा
रमण प्रेम अजय
अजय

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