स्वास्थ्य क्षेत्र पर सार्वजनिक व्यय 2024 तक बढ़ाकर जीडीपी का 2.5 प्रतिशत करने की जरूरत: एन के सिंह

स्वास्थ्य क्षेत्र पर सार्वजनिक व्यय 2024 तक बढ़ाकर जीडीपी का 2.5 प्रतिशत करने की जरूरत: एन के सिंह

स्वास्थ्य क्षेत्र पर सार्वजनिक व्यय 2024 तक बढ़ाकर जीडीपी का 2.5 प्रतिशत करने की जरूरत: एन के सिंह
Modified Date: November 29, 2022 / 08:02 pm IST
Published Date: November 18, 2020 1:03 pm IST

नयी दिल्ली,18 नवंबर (भाषा) पंद्रहवें वित्त आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने बुधवार को स्वास्थ्य क्षेत्र पर सार्वजनिक व्यय अगले चार साल मे बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया। फिलहाल यह जीडीपी का 0.95 प्रतिशत है।

उन्होंने देश के कुछ भागों में स्वास्थ्य संबंधी ढांचागत सुविधा की खराब स्थिति को लेकर चिंता जतायी। सिंह ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का जो गरीब हिस्सा है, वहां स्वास्थ्य संबंधी ढांचागत सुविधा की स्थिति बदतर है।’’

वित्त आयोग के चेयरमैन ने उद्योग मंडल सीआईआई के ‘एशिया हेल्थ 2020’ कार्यक्रम में कहा, ‘‘इसीलिए सवाल यह है कि भारत में विभिन्न राज्यों खासकर गरीब प्रदेशों में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे की उपलब्धता को लेकर जो विषम स्थिति है, उसका समाधान कैसे होगा?’’

उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्य दोनों को स्वास्थ्य मद में सार्वजनिक व्यय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने की जरूरत है।

सिंह ने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि केंद्र तथा राज्यों दोनों को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये खर्च उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि सार्वजनिक व्यय अगले चार साल 2024 तक जीडीपी का 2.5 प्रतिशत हो जो फिलहाल 0.95 प्रतिशत है। इसमें केंद्र और राज्यों दोनों के खर्च शामिल होंगे।’’

उन्होंने कहा कि एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) पाठ्यक्रम को व्यापक बनाने जैसे नियामकीय बदलाव पर भी गौर किया जा सकता है।

सिंह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी विशेषज्ञता के अन्य स्तरों पर हो सकती है और शोध के क्षेत्र में उनकी कुशलता को देखते हुए, उन जगहों पर भी जहां वे बेहतर स्थिति में हैं।’’

उन्होंने कहा कि वित्त आयोग ने अपनी सिफारिशों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर दिया है जो महत्वपूर्ण साबित होगा।

सिंह की अध्यक्षता वाला वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 के लिये अपनी रिपोर्ट नौ नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंप चुका है। रिपोर्ट संसद में रखे जाने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को अधिक मान्यता देने पर भी जोर दिया।

सिंह ने कहा, ‘‘हमें इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि सिविल सेवा कानून, 1951 में कहा गया था कि भारत ऑल इंडिया चिकित्सा सेवा गठित करेगा…यह आश्चर्यजनक है कि 1951 से लेकर अबतक, बेहतर अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को लेकर अखिल भारतीय स्वास्थ्य सेवा का गठन नहीं हुआ है।’’ उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कई मसले और चुनौतियां हैं, जिनके समाधान की जरूरत है।

भाषा

रमण मनोहर

मनोहर


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