आरबीआई ने इटावा के नगर सहकारी बैंक पर छह महीने के लिए लगाए अंकुश

आरबीआई ने इटावा के नगर सहकारी बैंक पर छह महीने के लिए लगाए अंकुश

आरबीआई ने इटावा के नगर सहकारी बैंक पर छह महीने के लिए लगाए अंकुश
Modified Date: May 18, 2026 / 07:00 pm IST
Published Date: May 18, 2026 7:00 pm IST

मुंबई, 18 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने निगरानी संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इटावा स्थित नगर सहकारी बैंक पर कई अंकुश लगा दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक ग्राहक के लिए निकासी सीमा 10,000 रुपये तय कर दी गई है।

आरबीआई के ये निर्देश सोमवार को कारोबार बंद होने के बाद से प्रभावी हो गए। ये अंकुश छह महीने तक लागू रहेंगे।

इन पाबंदियों के तहत बैंक आरबीआई की पूर्व-लिखित अनुमति के बिना ऋण नहीं दे सकेगा, नई जमा स्वीकार नहीं करेगा और न ही कोई धन उधार ले सकेगा।

आरबीआई ने कहा, “इस सहकारी बैंक की वर्तमान नकदी स्थिति को देखते हुए उसे बचत, चालू या किसी अन्य खाते से अधिकतम 10,000 रुपये तक निकासी की अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, निर्धारित शर्तों के अधीन जमा के विरुद्ध ऋण समायोजित किया जा सकेगा।”

केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंक कर्मचारियों के वेतन, किराया और बिजली बिल जैसे आवश्यक मदों पर खर्च कर सकेगा।

आरबीआई ने कहा कि हाल में बैंक में हुए घटनाक्रमों से उत्पन्न पर्यवेक्षण संबंधी चिंताओं और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए ये निर्देश जारी किए गए हैं।

केंद्रीय बैंक ने हाल के समय में बैंक के निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ उसके कामकाज में सुधार को लेकर बातचीत की थी।

आरबीआई ने कहा, “हालांकि, पर्यवेक्षण संबंधी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बैंक द्वारा ठोस प्रयास नहीं किए गए, जिसके कारण ये निर्देश जारी करने की आवश्यकता पड़ी।”

पात्र जमाकर्ताओं को ‘जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम’ (डीआईसीजीसी) से पांच लाख रुपये तक की जमा बीमा राशि प्राप्त करने का अधिकार होगा।

हालांकि केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों को बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक वह निर्धारित अंकुशों के अधीन बैंकिंग कारोबार जारी रख सकेगा।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम


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