आरबीआई का बैंकों के लिए पूंजी, जोखिमों के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने का प्रस्ताव
आरबीआई का बैंकों के लिए पूंजी, जोखिमों के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने का प्रस्ताव
मुंबई, 19 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को बासेल तीन मानदंडों के तहत बैंकों के लिए एक संशोधित खुलासा रूपरेखा का प्रस्ताव किया। इसके तहत बैंकों को पूंजी पर्याप्तता, नकदी और जोखिम के बारे में अधिक विस्तार से खुलासा करने के साथ उसे प्रकाशित करना होगा, ताकि पारदर्शिता और बाजार अनुशासन में सुधार हो सके।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंकों को कॉमन इक्विटी टियर 1 (सीईटी 1) पूंजी, कुल पूंजी, जोखिम-भारित परिसंपत्तियां (आरडब्ल्यूए), संपत्ति और परिचालन के वित्तपोषण के लिए कर्ज पर निर्भरता, नकदी कवरेज अनुपात (एलसीआर) और शुद्ध स्थिर वित्तपोषण अनुपात (एनएसएफआर) को शामिल करते हुए एक समान प्रारूप में तिमाही खुलासा करना होगा।
आरबीआई के मसौदा परिपत्र के अनुसार, बैंकों को पिछली तिमाहियों की तुलना में इन मापदंडों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों के पीछे के प्रमुख कारणों की भी जानकारी देनी होगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने परिपत्र के मसौदे पर दो जून तक सुझाव आमंत्रित किये हैं। इसके साथ ही यह भी घोषणा की है कि अंतिम निर्देश 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही से प्रभावी होंगे।
आरबीआई ने बैंकों की मुख्य गतिविधियों और सभी महत्वपूर्ण जोखिमों का विश्लेषण करने वाले खुलासे प्रस्तावित किए हैं, जिसमें प्रासंगिक आंकड़ों और जानकारी उपलब्ध हो।
बयान के अनुसार, बैंकों से अपेक्षा की जाती है कि वे इन जोखिमों की पहचान, उसे मापने और प्रबंधन के लिए अपनी प्रक्रियाओं और कार्यविधियों के बारे में पर्याप्त जानकारी प्रदान करें।
परिपत्र के मसौदे के अनुसार, बैंकों को अपनी वेबसाइट पर एक ‘नियामक खुलासा खंड’ बनाए रखना होगा, जहां खुलासों से संबंधित सभी जानकारी बाजार प्रतिभागियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, बैंकों को अपनी वेबसाइट पर कम से कम दस साल के लिए पिछली रिपोर्टिंग अवधियों से संबंधित बासेल स्तंभ तीन रिपोर्टों का एक संग्रह भी उपलब्ध कराना होगा।
भाषा रमण अजय
अजय

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