आरबीआई टाटा संस को सूचीबद्धता के बारे में स्पष्ट निर्देश जारी करेः इनगवर्न

आरबीआई टाटा संस को सूचीबद्धता के बारे में स्पष्ट निर्देश जारी करेः इनगवर्न

आरबीआई टाटा संस को सूचीबद्धता के बारे में स्पष्ट निर्देश जारी करेः इनगवर्न
Modified Date: May 1, 2026 / 09:53 pm IST
Published Date: May 1, 2026 9:53 pm IST

नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) संस्थागत निवेशकों को परामर्श देने वाली कंपनी इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से आग्रह किया है कि वह टाटा संस को उच्च स्तर वाली एनबीएफसी के रूप में मार्च 2027 तक सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करे।

इनगवर्न ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा नियामकीय परिदृश्य में इतने बड़े संस्थान को सार्वजनिक सूचीबद्धता से छूट देने का कोई कानूनी आधार नहीं बचा है। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों को नियंत्रित करती है।

सलाहकार फर्म ने यह मांग भी रखी है कि टाटा संस द्वारा ‘प्रमुख निवेश कंपनी ’ (सीआईसी) के रूप में पंजीकरण समाप्त करने के आवेदन को आरबीआई औपचारिक रूप से खारिज कर दे।

टाटा संस ने मार्च 2024 में यह आवेदन दायर किया था, जिसे फर्म ने सार्वजनिक सूचीबद्धता से बचने की एक कोशिश बताया।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में जारी संशोधित नियामकीय दिशा-निर्देशों के बाद यह आवेदन ‘प्रक्रियात्मक और वास्तविक रूप से अप्रासंगिक’ हो गया है। फर्म ने कहा कि कौशल-आधारित नियमन (एसबीआर) ढांचे के तहत अनिवार्य सूचीबद्धता से बचने का प्रयास मौजूदा वित्तीय निगरानी मानकों के अनुरूप नहीं है।

इनगवर्न ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के सूचीबद्धता नियम समूह स्तर पर संबंधित पक्षों में लेनदेन और पूंजी आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं। खासकर टाटा संस के तहत टीसीएस, टाटा मोटर्स और टाटा पावर जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के आने से यह जरूरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई को मार्च 2024 के आवेदन को खारिज करते हुए स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए, ताकि एसबीआर ढांचे की विश्वसनीयता बनी रहे और टाटा समूह में निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके।

फर्म ने यह भी कहा कि अप्रैल 2026 के मसौदा दिशानिर्देशों के तहत एक लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्ति सीमा को उच्च स्तर वाली एनबीएफसी के रूप में वर्गीकरण के लिए मानक बनाया जाना चाहिए। इस आधार पर टाटा संस अपने आकार के कारण स्वतः ही इस श्रेणी में आ जाती है।

हालांकि टाटा संस की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


लेखक के बारे में