आरबीआई के रेपो दर स्थिर रखने के फैसले को बैंकिंग विशेषज्ञों ने बताया संतुलित कदम
आरबीआई के रेपो दर स्थिर रखने के फैसले को बैंकिंग विशेषज्ञों ने बताया संतुलित कदम
मुंबई, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने के निर्णय को बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों ने संतुलित और विवेकपूर्ण कदम बताया है।
बैंकरों का कहना है कि यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की सोच को दर्शाता है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन एवं भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के अध्यक्ष सी एस शेट्टी ने कहा, “विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए एफसीएनआर (बी) जमा, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशों से उधारी और इक्विटी निवेश से जुड़े जो उपाय घोषित किए गए हैं, वे समयोचित और व्यापक हैं। इन कदमों से पूंजी प्रवाह में वृद्धि होगी, बॉन्ड बाजारों का विस्तार होगा, नकदी में सुधार आएगा और रुपये को मजबूती मिलेगी।”
बैंकिंग विशेषज्ञों ने कहा कि इन कदमों से बाजार में नकदी में सुधार होगा और रुपये को मजबूती मिलेगी।
इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “हालांकि अर्थव्यवस्था जुझारूपन दिखा रही है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। फिर भी पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाना उचित है।”
उन्होंने कहा, “रेपो दर को स्थिर रखकर आरबीआई चल रही आर्थिक सुधार प्रक्रिया की निरंतरता को मजबूत करता है और उधारी लागत में पहले से अनुमान लगाई जा सकने वाली स्थिति सुनिश्चित करता है, जो परिवारों और व्यवसायों दोनों के लिए राहत की बात है।”
आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए शुक्रवार को नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। इसके साथ ही तटस्थ रुख को भी कायम रखा गया है।
करूर वैश्य बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आर. रमेश बाबू ने कहा कि तटस्थ रुख के साथ रेपो दर को यथावत रखने का निर्णय एक स्थिर और संतुलित आर्थिक वातावरण सुनिश्चित करता है जिसमें वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करने की पर्याप्त गुंजाइश रहती है।
भाषा
योगेश प्रेम
प्रेम

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