अक्सर आर्थिक समीक्षा के अनुमानों से अधिक रहती है वास्तविक आर्थिक वृद्धि

अक्सर आर्थिक समीक्षा के अनुमानों से अधिक रहती है वास्तविक आर्थिक वृद्धि

अक्सर आर्थिक समीक्षा के अनुमानों से अधिक रहती है वास्तविक आर्थिक वृद्धि
Modified Date: January 27, 2026 / 04:01 pm IST
Published Date: January 27, 2026 4:01 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत की आर्थिक वृद्धि दर अक्सर आर्थिक समीक्षा में लगाए गए अनुमानों से अधिक रहती है। वित्त वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है, जबकि बजट-पूर्व इस दस्तावेज में इसके 6.3-6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रही थी, जबकि समीक्षा का अनुमान 6-6.8 प्रतिशत था।

हालांकि, 2024-25 में आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत रही, जो समीक्षा में दिए गए 6.5-7 प्रतिशत के अनुमान के अनुरूप थी।

विश्लेषण से संकेत मिलता है कि 2022-23 में वृद्धि का लक्ष्य चूक गया था। तब वास्तविक आर्थिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत रही थी, जबकि आर्थिक समीक्षा का अनुमान 8-8.5 प्रतिशत था।

वर्ष 2021-22 में कोविड महामारी के कारण आर्थिक समीक्षा में कोई अनुमान नहीं लगाया गया था। इस साल मुख्य रूप से आधार प्रभाव की वजह से वृद्धि दर 9.7 प्रतिशत रही थी।

कोविड महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन के कारण 2020-21 में वृद्धि दर नकारात्मक 5.8 प्रतिशत थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को आम बजट पेश करेंगी।

बजट से ठीक पहले पेश की जाने वाली यह समीक्षा सरकार की आर्थिक सोच को बताता है और नई नीतिगत निर्णयों की घोषणा से पहले देश की वित्तीय स्थिति का विस्तृत विवरण देता है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


लेखक के बारे में