रिलायंस के प्रवर्तकों ने अप्रैल-जून तिमाही में हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत बढ़ाई
रिलायंस के प्रवर्तकों ने अप्रैल-जून तिमाही में हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत बढ़ाई
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के प्रवर्तक समूह ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बाजार से शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसे देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नियामकीय शेयरधारिता के आंकड़ों के अनुसार, प्रवर्तक और प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी अप्रैल-जून तिमाही के अंत में बढ़कर 50.48 प्रतिशत हो गई, जो तीन महीने पहले (जनवरी-मार्च) करीब 50 प्रतिशत थी।
यह खरीद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के ‘क्रीपिंग एक्विजिशन’ नियमों के तहत अनुमत सीमा के भीतर की गई। इन नियमों के तहत प्रवर्तक निर्धारित सीमा के अधीन अनिवार्य खुली पेशकश लाए बिना धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।
बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि प्रवर्तक समूह ने इन शेयर की खरीद पर 8,500 करोड़ से 9,000 करोड़ रुपये खर्च किए होंगे।
कंपनी की ताजा शेयरधारिता जानकारी के अनुसार, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी, उनकी पत्नी और उनके तीन बच्चों ईशा, आकाश और अनंत के पास कंपनी के 1.61-1.61 करोड़ शेयर हैं। यह प्रत्येक के लिए 0.12 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। उनकी मां के. डी. अंबानी के पास 3.14 करोड़ शेयर यानी 0.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
शेष शेयर प्रवर्तक समूह की विभिन्न इकाइयों के पास हैं। इनमें श्रीचक्र कमर्शियल्स एलएलपी की हिस्सेदारी सबसे अधिक 10.93 प्रतिशत है। देवर्षि कमर्शियल्स एलएलपी, करुणा कमर्शियल एलएलपी और तत्त्वम एंटरप्राइजेज एलएलपी की हिस्सेदारी 8.06-8.06 प्रतिशत है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रिलायंस खुदरा, डिजिटल, नई ऊर्जा और उपभोक्ता कारोबार में भारी निवेश कर रही है एवं दीर्घकालिक वृद्धि के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।
आमतौर पर प्रवर्तकों की हिस्सेदारी बढ़ने को कंपनी की संभावनाओं के प्रति प्रबंधन के भरोसे का संकेत माना जाता है। इससे प्रवर्तकों का नियंत्रण मजबूत होता है और सार्वजनिक हिस्सेदारी में मामूली कमी आती है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के सौदे अक्सर इस धारणा को दर्शाते हैं कि शेयर में लंबी अवधि के लिए आकर्षक मूल्य है, न कि किसी निकट भविष्य की कॉरपोरेट कार्रवाई का संकेत।
उनका मानना है कि इस बढ़ोतरी का कंपनी के परिचालन पर तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन निवेशक इसे रिलायंस की आय वृद्धि एवं भविष्य की पूंजी आवंटन योजनाओं के प्रति प्रवर्तकों के भरोसे के रूप में सकारात्मक संकेत मान सकते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम रिलायंस की दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं को लेकर प्रवर्तकों के विश्वास को दर्शाता है।
अल्पसंख्यक निवेशकों के लिए भी इसे सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर प्रवर्तकों की ओर से शेयर खरीद को कंपनी के प्रति उनके भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है।
भाषा निहारिका वैभव
वैभव

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