सेबी ने नवीनीकरण शुल्क नहीं देने पर 10 शोध विश्लेषकों के पंजीकरण रद्द किए

सेबी ने नवीनीकरण शुल्क नहीं देने पर 10 शोध विश्लेषकों के पंजीकरण रद्द किए

सेबी ने नवीनीकरण शुल्क नहीं देने पर 10 शोध विश्लेषकों के पंजीकरण रद्द किए
Modified Date: July 29, 2026 / 04:36 pm IST
Published Date: July 29, 2026 4:36 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने अनिवार्य नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं करने पर 10 शोध विश्लेषकों (आरए) के पंजीकरण रद्द कर दिए हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने यह कार्रवाई ‘मध्यस्थ विनियम, 2008’ के तहत की है। नियामक ने कहा कि संबंधित इकाइयों को नोटिस भेजे जाने के बावजूद उन्होंने अपने पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया।

सेबी ने मंगलवार को जारी आदेश में जिन इकाइयों के पंजीकरण रद्द किए उनमें इम्तियाज रहमान मर्चेंट, प्रवीण पाथियिल, इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, एफ्लूएंस फिनकॉन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, प्रिया क्लाइड एंड्रेड्स और प्रफुल बोहरा शामिल हैं।

सेबी के नियमों के मुताबिक, पंजीकृत शोध विश्लेषक को हर पांच साल में नवीनीकरण शुल्क जमा करना होता है, तभी उनका प्रमाणपत्र वैध रहता है। लेकिन जांच में पाया गया कि इन 10 इकाइयों ने जुलाई, 2020 से दिसंबर, 2025 के बीच देय शुल्क का भुगतान नहीं किया।

नियामक ने फरवरी, 2025 और इस वर्ष मई में नोटिस जारी कर इन इकाइयों से पूछा था कि उनका पंजीकरण क्यों न रद्द या निलंबित किया जाए, लेकिन किसी ने भी तय समय के भीतर जवाब नहीं दिया।

इसके बाद सेबी ने इन सभी के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए। आदेश में कहा गया है कि यह कदम समाप्त हो चुके पंजीकरण के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण रद्द होने के बावजूद ये इकाइयां शोध विश्लेषक के तौर पर किए गए किसी भी कार्य या चूक के लिए जिम्मेदार रहेंगी।

बाजार नियामक ने एक अलग आदेश में ‘फर्स्टकैपिटल अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट’ का पंजीकरण भी रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई वर्ष 2025 की मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर तिमाहियों की गतिविधि रिपोर्ट (क्यूएआर) समय पर दाखिल नहीं करने के कारण की गई।

फर्स्टकैपिटल अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट एक पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) है। नियमों के तहत हर एआईएफ को प्रत्येक तिमाही समाप्त होने के 15 दिन के भीतर अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट नियामक को सौंपनी होती है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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