अमेरिकी शुल्क की चिंता से सेंसेक्स 780 अंक लुढ़का, निफ्टी 26,000 के नीचे आया
अमेरिकी शुल्क की चिंता से सेंसेक्स 780 अंक लुढ़का, निफ्टी 26,000 के नीचे आया
मुंबई, आठ जनवरी (भाषा) वैश्विक बाजारों में व्यापक बिकवाली और अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका के बीच बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में लगातार चौथे दिन गिरावट आई। सेंसेक्स 780 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी 264 अंक टूटकर 26,000 के नीचे आ गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, धातु, तेल एवं गैस और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 प्रतिशत लुढ़ककर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 851.04 अंक तक गिरकर 84,110.10 के स्तर तक आ गया था।
बीएसई पर कुल 3,158 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,039 शेयरों में बढ़त हुई और 170 शेयर अपरिवर्तित रहे।
वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 263.90 अंक यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 25,876.85 अंक पर बंद हुआ।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अजीत मिश्रा ने कहा, ‘बढ़ते भौगोलिक तनावों और वैश्विक व्यापार संबंधी चिंताओं के बीच बाजार का रुख कमजोर हुआ, जिससे कुल मिलाकर जोखिम उठाने की प्रवृत्ति प्रभावित हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और रुपये की कमजोरी ने नकारात्मक रुझान को और बढ़ा दिया। वैश्विक संकेत मिले-जुले रहने और वित्तीय नतीजों के आने के साथ, कारोबारी गतिविधि सतर्क रही और मुख्य रूप से शेयरों तक ही सीमित रही।’
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से लार्सन एंड टुब्रो, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और ट्रेंट सबसे ज्यादा नुकसान में रहीं।
दूसरी तरफ, इटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक गौरव गर्ग ने कहा, ‘भारतीय शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को लगातार चौथे सत्र में गिरावट जारी रही और चार महीने से अधिक समय में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।’
पिछले चार दिनों में बीएसई बेंचमार्क 1,581.05 अंक यानी 1.84 प्रतिशत टूटा जबकि और निफ्टी 451.7 अंक यानी 1.71 प्रतिशत नुकसान में रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऐसे प्रतिबंधात्मक विधेयक का समर्थन किए जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है।
इस विधेयक को पेश करने की तैयारी में जुटे सीनेटर (सांसद) लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि इससे अमेरिका को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करने का दबाव बनाने के लिए ‘जबर्दस्त ताकत’ मिलेगी।
अमेरिकी प्रशासन पिछले साल अगस्त में ही भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को बड़ाकर 50 प्रतिशत कर चुका है। इसमें से 25 प्रतिशत शुल्क रूसी तेल खरीद जारी रखने के जुर्माने के तौर पर लगाया गया था।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘अमेरिकी शुल्क को लेकर नई चिंताओं और एफआईआई की लगातार बिकवाली के चलते घरेलू बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा, जिससे मुनाफे की उम्मीदें फीकी पड़ गईं।’
बीएसई में मझोली कंपनियों का सूचांक बीएसई मिडकैप में 1.99 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि छोटी कंपनियों के सूचकांक बीएसई स्मॉलकैप में 1.97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक बढ़त में रहा, जबकि जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में बंद हुए।
यूरोपीय बाजार हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को ज्यादातर कमजोर रहे।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,889.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
बुधवार को सेंसेक्स 102.20 अंक गिरकर 84,961.14 और निफ्टी 37.95 अंक फिसलकर 26,140.75 पर बंद हुआ था।
भाषा योगेश रमण
रमण

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