अंतरिक्ष कंपनी आईसीआईवाईई एशिया-प्रशांत का पहला उपग्रह विनिर्माण केंद्र भारत में बनाएगी

अंतरिक्ष कंपनी आईसीआईवाईई एशिया-प्रशांत का पहला उपग्रह विनिर्माण केंद्र भारत में बनाएगी

अंतरिक्ष कंपनी आईसीआईवाईई एशिया-प्रशांत का पहला उपग्रह विनिर्माण केंद्र भारत में बनाएगी
Modified Date: May 17, 2026 / 08:26 pm IST
Published Date: May 17, 2026 8:26 pm IST

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) अंतरिक्ष आधारित खुफिया सेवाओं में वैश्विक स्तर की कंपनी आईसीईवाईई अगले एक वर्ष के भीतर भारत में अपनी पहली विनिर्माण इकाई स्थापित करेगी।

इस इकाई में रक्षा, निगरानी और पर्यावरणीय निगरानी के लिए छोटे उपग्रहों का निर्माण किया जाएगा।

आईसीईवाईई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक राफेल मोद्रजेवस्की ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि यह इकाई एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए कंपनी का प्रमुख विनिर्माण केंद्र होगी। इससे यूरोप और अमेरिका में उसकी मौजूदा विनिर्माण गतिविधियों को भी सहयोग मिलेगा।

कंपनी के उपग्रह समूह वर्तमान में रक्षा एवं खुफिया सेवाओं से लेकर बीमा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच आईसीईवाईई की प्रौद्योगिकी की मांग में तेजी आई है।

उन्होंने कहा, “भारत की जरूरतों और हमारी पेशकशों के बीच मजबूत सामंजस्य है। दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है और अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं को तेजी से अपनाया जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “भारत में भी यही दोनों रुझान दिखाई दे रहे हैं। हालिया संघर्षों से देशों को यह समझ में आया है कि अंतरिक्ष अब खुफिया और रक्षा का अगला बड़ा क्षेत्र बन चुका है। हम रक्षा और खुफिया सेवाओं में विशेषज्ञता रखते हैं, इसलिए भारत हमारे लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है।”

मोद्रजेवस्की ने कहा कि कंपनी अंतरिक्ष आधारित आंकड़ों पर आधारित राष्ट्रीय खुफिया प्रणालियों में विशेषज्ञता रखती है।

उन्होंने कहा कि पहले खुफिया तंत्र कई स्रोतों पर निर्भर होता था, लेकिन अब अंतरिक्ष आधारित प्रणालियां प्रमुख स्रोत बनती जा रही हैं।

मोद्रजेवस्की ने कहा, “हम दुनियाभर की सरकारों को केवल उपग्रह ही नहीं, बल्कि उपग्रह संचालन से जुड़ी जमीनी सुविधाएं और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराते हैं। हमारे ग्राहक यूरोप, जापान, पश्चिम एशिया, ब्राजील, कनाडा और अमेरिका तक फैले हुए हैं।”

भारत में निवेश की राशि का खुलासा करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी पहले वर्ष में लगभग 10 उपग्रहों का निर्माण करने की योजना बना रही है और अगले वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 से 40 उपग्रह प्रतिवर्ष किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “निवेश काफी बड़ा होगा और इसके करोड़ों अमेरिकी डॉलर के दायरे में रहने की संभावना है, हालांकि अंतिम आंकड़े अभी तय किए जा रहे हैं।”

आईसीईवाईई के पास दुनिया का सबसे उन्नत सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) उपग्रह समूह है और कंपनी अपने ग्राहकों को खुफिया एवं निगरानी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

मोद्रजेवस्की ने कहा, “यह कहना बिल्कुल सही होगा कि भारत यूरोप और अमेरिका के साथ हमारे लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन सकता है।”

उन्होंने कहा कि कुशल प्रतिभाओं की बड़ी उपलब्धता, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और उन्नत खुफिया समाधानों की बढ़ती जरूरत के कारण भारत कंपनी के लिए बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।

वर्तमान में आईसीईवाईई हर साल लगभग 50 उपग्रह बनाती है और 2028 तक इस संख्या को 100 से अधिक करने की योजना है।

मोद्रजेवस्की ने कहा, “आने वाले वर्षों में हम सैकड़ों और उपग्रह तैनात करने की योजना बना रहे हैं। भारत में निर्मित उपग्रह वैश्विक बाजारों के साथ-साथ स्थानीय मांग को भी पूरा करेंगे। हम भारत में अपनी मौजूदगी को केवल सरकारी ऑर्डर पर निर्भर नहीं बना रहे हैं।”

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में निर्मित उपग्रह वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करेंगे और साथ ही स्थानीय मांग को भी सहायता देंगे। हम भारत में अपनी उपस्थिति को पूरी तरह से सरकारी ऑर्डरों पर निर्भर नहीं रख रहे हैं। हम ऑर्डर बुक की स्थिति से इतर यहां विनिर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

मोद्रजेवस्की ने कहा, “हमारे मौजूदा परिचालन के जरिये भारत में पहले से ग्राहक हैं। हम सरकारी पक्षों सहित मौजूदा और संभावित ग्राहकों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं, लेकिन इस स्तर पर अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती।”

उन्होंने संकेत दिया कि आईसीईवाईई अपनी महत्वाकांक्षी योजना को लेकर संबंधित सरकारी विभागों के साथ भी चर्चा कर रही है।

मोद्रजेवस्की ने कहा, “हम एक स्थापित कंपनी हैं और स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम हैं। हालांकि, सरकार के साथ खुला संवाद और सहयोग हमारे लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से वहां जहां प्राथमिकताओं और क्षमताओं में समानता हो। अभी तक हमें कोई बड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा है।”

आईसीईवाईई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि कंपनी भारत में संभावित साझेदारी के अवसर भी तलाश रही है। इसमें इसरो जैसे उपग्रह प्रक्षेपण सेवा प्रदाता, निजी क्षेत्र की कंपनियां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं अन्य पुर्जों के निर्माता, प्रौद्योगिकी साझेदार तथा ड्रोन एवं एकीकृत रक्षा प्रणालियों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।

फिनलैंड में स्थापित और मुख्यालय वाली आईसीईवाईई के पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रीस और अमेरिका में 1,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

कंपनी का राजस्व इस वर्ष लगभग 28 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर चुका है और इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

मोद्रजेवस्की ने कहा, “भारत इस वर्ष हमारे लिए प्राथमिकता वाला बाजार है और हम यहां मजबूत उपस्थिति बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

भाषा योगेश नेत्रपाल

नेत्रपाल


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