शेयर बाजार मे गिरावट एफपीआई के लिए भारत में निवेश का बड़ा अवसर : सेबी पूर्णकालिक सदस्य
शेयर बाजार मे गिरावट एफपीआई के लिए भारत में निवेश का बड़ा अवसर : सेबी पूर्णकालिक सदस्य
मुंबई, 19 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए भारत में निवेश बढ़ाने का ‘‘बेहद बड़ा अवसर’’ पेश करती है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय पूंजी बाजार इस समय ‘‘काफी आकर्षक’’ है और एफपीआई के रूप में पंजीकृत निवेशकों के लिए अच्छा अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने यहां रूस-भारत पूंजी बाजार एकीकरण मंच में कहा, ‘‘ पिछले कुछ महीनों में जो हालात बने हैं, खासकर युद्ध शुरू होने के बाद…उसके मद्देनजर भारतीय शेयर बाजार में निवेश का बड़ा अवसर है।’’
कई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एफपीआई भारतीय बाजारों में शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं और मार्च के पहले 12 दिन में ही उन्होंने 77,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है।
कार्यक्रम में वार्ष्णेय ने रूस से भारत में निवेश को सुगम बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और इसके लिए विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्यसमूह बनाने का प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने रूसी कंपनियों से भारत में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने का भी आग्रह किया और कहा कि कुछ विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों का मूल्यांकन उनके घरेलू बाजार में स्थित मूल कंपनी से अधिक होता है।
वार्ष्णेय ने कहा कि 23 रूसी इकाइयां सेबी के साथ एफपीआई के रूप में पंजीकृत हैं और वे स्थानीय स्तर पर ऋण एवं इक्विटी दोनों बाजारों में निवेश कर सकती हैं।
इसी कार्यक्रम में रूस और बेलारूस संघ राज्य के राज्य सचिव सर्गेई ग्लाजयेव ने नई डिजिटल मुद्रा आधारित अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली की वकालत की।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमें एक नई वित्तीय संरचना बनानी चाहिए जो राष्ट्रीय मुद्राओं पर आधारित हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता तथा आपसी भरोसे को बढ़ावा दे।’’
वार्ष्णेय ने कहा कि अमेरिका, इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ जो युद्ध कर रहा है, उसमें सफल नहीं होगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र दक्षिण और पूर्व एशिया की ओर स्थानांतरित होगा।
देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एनएसई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक आशीषकुमार चौहान ने कहा कि रूस-भारत साझेदारी गहराई, निरंतरता एवं रणनीतिक महत्व की है और अब इसे व्यावहारिक वित्तीय ढांचे में बदलने की जरूरत है।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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