टीसीएस, टाटा समूह ने एआई अवसंरचना विकसित करने व संयुक्त समाधान पेश करने के लिए ओपनएआई से साझेदारी की

Ads

टीसीएस, टाटा समूह ने एआई अवसंरचना विकसित करने व संयुक्त समाधान पेश करने के लिए ओपनएआई से साझेदारी की

  •  
  • Publish Date - February 19, 2026 / 10:47 AM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 10:47 AM IST

मुंबई, 19 फरवरी (भाषा) टाटा समूह और उसकी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा इकाई टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने ओपनएआई के साथ बहुआयामी साझेदारी की बृहस्पतिवार को घोषणा की। इसका मकसद कृत्रिम मेधा (एआई) अवसंरचना के निर्माण और बाजार में संयुक्त समाधान उपलब्ध कराने पर रहेगा।

यह साझेदारी टाटा समूह के हजारों कर्मचारियों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए ओपनएआई के उद्यम चैट जीपीटी तक पहुंच भी प्रदान करेगी। इसमें सामाजिक प्रभाव का पहलू भी शामिल है, जिसके तहत भागीदार भारतीय युवाओं को प्रशिक्षित करने और 10 लाख लोगों की आजीविका सुधारने के लिए उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे।

आधिकारिक बयान के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के हाल में घोषित डेटा केंद्र कारोबार ‘हाइपरवॉल्ट’ और ओपनएआई प्रारंभिक चरण में 100 मेगावाट की कृत्रिम मेधा क्षमता विकसित करेंगे। यह बहुवर्षीय साझेदारी भारत को वैश्विक एआई केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से की जा रही है। बयान में कहा गया कि इस क्षमता को बढ़ाकर एक गीगावाट तक भी किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि टीसीएस ने पहले डेटा केंद्र कारोबार के लिए टीपीजी से एक अरब डॉलर का निवेश हासिल किया था और कहा था कि निजी इक्विटी कंपनी इस कारोबार में 27.5 से 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी।

ओपनएआई के साथ यह साझेदारी नयी दिल्ली में जारी ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान घोषित की गई है। इससे पहले इन्फोसिस ने उद्यम कृत्रिम मेधा समाधान देने के लिए एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी की घोषणा की थी।

ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने कहा, “ … हमारी साझेदारी के माध्यम से हम मिलकर वह अवसंरचना, कौशल और स्थानीय साझेदारियां तैयार कर रहे हैं, जिनकी जरूरत भारत के साथ, भारत के लिए और भारत में कृत्रिम मेधा निर्माण के लिए है ताकि देश भर में अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।’’

उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही कृत्रिम मेधा अपनाने में अग्रणी है और अपनी प्रतिभा, महत्वाकांक्षा तथा मजबूत सरकारी समर्थन के कारण इसके भविष्य को आकार देने की अच्छी स्थिति में है।

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इसे दोनों संस्थाओं के बीच गहन सहयोग बताते हुए कहा कि यह भारत के वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा में अग्रणी बनने के दृष्टिकोण की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, “यह ओपनएआई और टीसीएस के लिए उद्योगों को रूपांतरित करने का अनूठा अवसर है। हम मिलकर भारत के युवाओं को कौशल देंगे और उन्हें कृत्रिम मेधा युग में सफल होने के लिए सशक्त बनाएंगे।”

भाषा निहारिका रंजन

रंजन