देश में डिजिटल वीडियो खपत का शहरी-ग्रामीण अंतर लगभग खत्म, शॉर्ट वीडियो बने पसंदः रिपोर्ट

देश में डिजिटल वीडियो खपत का शहरी-ग्रामीण अंतर लगभग खत्म, शॉर्ट वीडियो बने पसंदः रिपोर्ट

देश में डिजिटल वीडियो खपत का शहरी-ग्रामीण अंतर लगभग खत्म, शॉर्ट वीडियो बने पसंदः रिपोर्ट
Modified Date: June 4, 2026 / 10:37 pm IST
Published Date: June 4, 2026 10:37 pm IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने के मामले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच का अंतर लगभग खत्म हो गया है जबकि छोटे वीडियो परोसने वाले मंच अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहकर उपभोक्ता खरीद निर्णयों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बन गए हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं व्हाट्सऐप का संचालन करने वाली कंपनी मेटा द्वारा कराए गए एक अध्ययन के अनुसार, इसके मंचों पर दैनिक वीडियो व्यस्तता शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग समान स्तर पर है।

रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में 98 प्रतिशत और ग्रामीण भारत में 94 प्रतिशत उपयोगकर्ता प्रतिदिन वीडियो कंटेंट से जुड़ रहे हैं, जो दोनों क्षेत्रों के बीच लगभग समान डिजिटल उपभोग को दर्शाता है। कुल मिलाकर देश में 97 प्रतिशत उपयोगकर्ता प्रतिदिन वीडियो देखते हैं।

अध्ययन में कहा गया है कि शॉर्ट-फॉर्म वीडियो प्लेटफॉर्म अब उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे डिजिटल कंटेंट का दायरा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है।

यह अध्ययन 23 शहरों में 4,000 से अधिक लोगों पर किया गया, जिसमें महानगरों के साथ-साथ मझोले और छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शॉर्ट वीडियो को केवल मनोरंजन का माध्यम मानने की धारणा अब बदल रही है और लोग पर वीडियो देखकर खरीदारी करने के फैसले भी ले रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, मेटा का शॉर्ट वीडियो फीचर ‘रील्स’ 81 प्रतिशत उत्पाद खोज, 66 प्रतिशत ब्रांड विचार और 47 प्रतिशत अंतिम खरीद निर्णयों को प्रभावित करता है।

भाषा

योगेश रमण प्रेम

प्रेम


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