अमेरिका ने डीटीएच के लिए घरेलू उपग्रहों को प्राथमिकता, इंटरनेट बंद करने को व्यापार बाधा दिया करार

अमेरिका ने डीटीएच के लिए घरेलू उपग्रहों को प्राथमिकता, इंटरनेट बंद करने को व्यापार बाधा दिया करार

अमेरिका ने डीटीएच के लिए घरेलू उपग्रहों को प्राथमिकता, इंटरनेट बंद करने को व्यापार बाधा दिया करार
Modified Date: April 1, 2026 / 11:06 am IST
Published Date: April 1, 2026 11:06 am IST

(सागर कुलकर्णी)

वॉशिंगटन, एक अप्रैल (भाषा) अमेरिका ने डीटीएच (डायरेक्ट-टू-होम) टीवी सेवाओं के लिए घरेलू उपग्रहों को प्राथमिकता देने और स्थानीय स्तर पर इंटरनेट बंद करने की भारत की नीति को विदेशी व्यापार में बाधा करार दिया है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय की ओर से जारी 2026 राष्ट्रीय व्यापार अनुमान रिपोर्ट ‘ऑन फॉरेन ट्रेड बैरियर्स’ में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2021 से अमेरिकी कंपनियों को सामग्री (कंटेंट) एवं उपयोगकर्ता खातों को हटाने के लिए बढ़ती संख्या में ऐसे अनुरोध मिले हैं, जो ‘‘ राजनीतिक रूप से प्रेरित’’ प्रतीत होते हैं।

इसमें कहा गया कि स्थानीय स्तर पर इंटरनेट बंद होने से सूचना एवं सेवाओं तक पहुंच सीमित होती है जिससे व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और डिजिटल सेवाओं से होने वाली आय बाधित होती है।

रिपोर्ट के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय डीटीएच सेवाओं के लिए भारतीय उपग्रहों के उपयोग को प्राथमिकता देता है।

इसमें कहा गया कि व्यवहार में डीटीएच लाइसेंसधारकों को विदेशी उपग्रह संचालकों से सीधे अनुबंध करने की अनुमति नहीं मिलती और ऐसा करने की कोशिश पर उन्हें प्रक्रियात्मक देरी का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट के मुताबिक डीटीएच कंपनियों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक इकाई ‘एंट्रिक्स’ के माध्यम से उपग्रह क्षमता प्राप्त करनी होती है। ‘एंट्रिक्स’ केवल तब विदेशी उपग्रह क्षमता की अनुमति देता है जब भारतीय उपग्रहों में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध नहीं होती।

यदि विदेशी उपग्रह क्षमता की अनुमति दी जाती है तो विदेशी संचालक को क्षमता इसरो को बेचनी होती है जिसके बाद इसरो उसे अतिरिक्त शुल्क के साथ अंतिम उपयोगकर्ता को उपलब्ध कराता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका…भारत को ‘ओपन स्काई’ उपग्रह नीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है ताकि उपभोक्ताओं को अपनी व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार उपग्रह सेवा प्रदाता चुनने की स्वतंत्रता मिल पाए एवं विदेशी कंपनियों को बाजार में अधिक पहुंच मिले।

रिपोर्ट में दूरसंचार विभाग के नए सुरक्षा निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत उपग्रह संचार (सैटकॉम) सेवा प्रदाताओं को ‘रीयल-टाइम इंटरसेप्शन’, सरकार द्वारा चिन्हित वेबसाइट तथा उपयोगकर्ताओं पर रोक लगाने, संवेदनशील क्षेत्रों में सेवा सीमित करने और भारतीय उपयोगकर्ताओं के सभी शुल्क तथा डीएनएस (डोमेन नेम सिस्टम) को भारत स्थित सुविधाओं के माध्यम से संचालित करने की क्षमता सुनिश्चित करनी होगी।

इसके अलावा सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ता ‘टर्मिनल’ (वह उपकरण जिससे सीधे सिगन्ल मिलता है) का पंजीकरण और नियमित सत्यापन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उपयोगकर्ता व उपकरण संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना, सीमा क्षेत्रों के पास ‘जियो-फेंसिंग’ (लोकेशन-आधारित सेवा) तथा विशेष निगरानी क्षेत्र लागू करना एवं अनधिकृत पहुंच या ‘लोकेशन स्पूफिंग’ (आईपी एड्रेस व भौगोलिक स्थिति छुपाने के प्रयास) को रोकना होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उपग्रह संचार कंपनियों को यह वादा करना होगा कि वे भारतीय उपयोगकर्ता डेटा को देश के बाहर न तो भेजेंगे और न ही वहां उसे डिक्रिप्ट (कोड से सामान्य भाषा में बदलना) करेंगे। साथ ही वाणिज्यिक सेवाएं शुरू होने के पांच वर्ष के भीतर अपने जमीनी बुनियादी ढांचे का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही हासिल करने के लिए चरणबद्ध योजना प्रस्तुत करनी होगी।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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