वेदांता को जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए कभी उच्चतम बोलीदाता घोषित नहीं किया: समाधान पेशेवर

वेदांता को जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए कभी उच्चतम बोलीदाता घोषित नहीं किया: समाधान पेशेवर

वेदांता को जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए कभी उच्चतम बोलीदाता घोषित नहीं किया: समाधान पेशेवर
Modified Date: April 17, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: April 17, 2026 3:56 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) कर्ज में डूबी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के समाधान पेशेवर ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) को बताया कि दिवाला प्रक्रिया में वेदांता को उच्चतम बोलीदाता बताने वाली कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी।

समाधान पेशेवर (आरपी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सभी बोलीदाताओं को पांच सितंबर को भेजा गया ईमेल केवल चुनौती प्रक्रिया के दौरान खोजी गई उच्चतम वित्तीय कीमत की जानकारी देने के लिए था। यह सफल बोलीदाता की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि वेदांता का उच्चतम बोलीदाता होने का दावा ”महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने” जैसा है। सिंघवी ने तर्क दिया कि खनन समूह (वेदांता) द्वारा पेश किया गया मामला ”बुनियादी तथ्यों के बिना” है। उन्होंने कार्यवाही के दौरान कहा, ”यह एक सामान्य ईमेल था, जिसमें बताया गया था कि भविष्य में क्या होगा और मूल्यांकन कैसे किया जाएगा।”

सिंघवी ने स्पष्ट किया कि ईमेल में यह नहीं कहा गया है कि वेदांता उच्चतम बोलीदाता है। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि ईमेल ”केवल यह बताता है कि पहचान किए गए मानदंडों के अनुसार उच्चतम शुद्ध संपत्ति मूल्य (एनएवी) के आधार पर 12,505 करोड़ रुपये है।”

उन्होंने कहा कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) ने योजनाओं का मूल्यांकन केवल उच्चतम शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) के आधार पर नहीं, बल्कि मात्रात्मक और गुणात्मक मानकों के आधार पर किया था। कुल 100 अंकों के स्कोर में 80 अंक मात्रात्मक स्कोर के थे और बाकी 20 अंक गुणात्मक स्कोर के थे।

वेदांता ने अपनी दो याचिकाओं में ऋणदाताओं द्वारा अदाणी के अधिग्रहण प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले को चुनौती दी है। कंपनी का दावा है कि उसकी बोली अदाणी समूह की तुलना में सकल मूल्य में लगभग 3,400 करोड़ रुपये और एनपीवी (शुद्ध वर्तमान मूल्य) में लगभग 500 करोड़ रुपये अधिक है।

सिंघवी ने कहा कि वेदांता द्वारा आठ नवंबर को दिया गया संशोधित प्रस्ताव नियमों के खिलाफ था। यदि एक आवेदक को प्रक्रिया बंद होने के बाद संशोधन की अनुमति दी जाती, तो सभी को वही मौका देना पड़ता। इससे प्रक्रिया की अंतिम परिणति कभी नहीं हो पाती।

चेयरमैन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की है। बैंकों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सोमवार से अपनी दलीलें शुरू करेंगे।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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