विश्व बैंक ने टाटा पावर-डीजीपीसी जलविद्युत परियोजना के लिए 81.5 करोड़ डॉलर की मंजूरी दी

विश्व बैंक ने टाटा पावर-डीजीपीसी जलविद्युत परियोजना के लिए 81.5 करोड़ डॉलर की मंजूरी दी

विश्व बैंक ने टाटा पावर-डीजीपीसी जलविद्युत परियोजना के लिए 81.5 करोड़ डॉलर की मंजूरी दी
Modified Date: January 23, 2026 / 06:36 pm IST
Published Date: January 23, 2026 6:36 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) विश्व बैंक ने 1,125 मेगावाट की दोर्जीलुंग जलविद्युत परियोजना के लिए 81.5 करोड़ डॉलर के दीर्घकालिक वित्तपोषण पैकेज को मंजूरी दी है। इस परियोजना में टाटा पावर की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इस विशेष उद्देश्यीय इकाई (एसपीवी) में शेष 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भूटान की ‘ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन’ (डीजीपीसी) के पास है।

टाटा पावर ने एक बयान में बताया कि विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने ‘दोर्जीलुंग हाइड्रो पावर लिमिटेड’ (डीएचपीएल) के लिए इस वित्तीय सहायता को स्वीकृति दी है।

इस वित्तीय पैकेज में अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) से 15 करोड़ डॉलर का अनुदान और 15 करोड़ डॉलर का ऋण शामिल है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी)के कम आय वाले देशों के लिए विशेष कर्ज सुविधा के तहत भूटान सरकार को 1.5 करोड़ डॉलर का ‘एन्क्लेव’ ऋण दिया जाएगा।

पैकेज में डीएचपीएल के लिए आईबीआरडी से 20 करोड़ डॉलर का ‘एन्क्लेव’ कर्ज और अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) से 30 करोड़ डॉलर का ऋण भी शामिल है। परियोजना का शेष वित्त पोषण जरूरतों को बाजार के विभिन्न प्रतिभागियों के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

टाटा पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी ‘टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड’ भारत में बिजली के आयात और उसके वितरण के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित होने वाली यह भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना होगी। इससे सालाना 4,500 गीगावाट घंटे से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा होने की उम्मीद है।

इससे भूटान की स्थापित ऊर्जा क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि होगी और भारत को स्वच्छ ऊर्जा के विश्वसनीय निर्यातक के रूप में उसकी स्थिति मजबूत होगी।

परियोजना से वार्षिक बिजली उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा भारत को आपूर्ति किया जाएगा।

भाषा सुमित रमण

रमण


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