Bilaspur High Court: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पहली पत्नी के रहते मान्य नहीं होगी दूसरी शादी

Bilaspur High Court: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पहली पत्नी के रहते मान्य नहीं होगी दूसरी शादी

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 07:21 PM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 08:26 PM IST

Bilaspur High Court/Image Source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कानूनी रूप से शून्य मानी जाएगी
  • दूसरी पत्नी और उसकी संतान का संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा
  • बिलासपुर हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद में पहली पत्नी के बच्चों के पक्ष में फैसला सुनाया

बिलासपुर: Bilaspur High Court छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक कानून और उत्तराधिकार को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि पहली पत्नी के रहते चूड़ी प्रथा के आधार पर की गई दूसरी शादी को मान्य नहीं होगी। ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी या उसकी संतान का संपत्ति में कोई हक नहीं होगा। कोर्ट ने साफ किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत पहली पत्नी के जीवित रहते की गई दूसरी शादी शून्य मानी जाएगी।

Bilaspur High Court News दरसअल, आज बिलासपुर हाईकोर्ट में संपत्ति से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई है। यह मामला पहली और दूसरी पत्नी की बेटियों के बीच संपत्ति विवाद से जुड़ा था। कोर्ट ने इस विवाद में पहली पत्नी के बच्चों के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट के मुताबिक संपत्ति पर अधिकार पहली पत्नी के बच्चों का ही होगा।

पहली पत्नी की संतान का ही अधिकार

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ पटवारी या राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो जाने से कोई व्यक्ति कानूनी वारिस नहीं बन जाता। कोर्ट ने साफ किया कि संपत्ति पर अधिकार तय करने में केवल रिकॉर्ड एंट्री नहीं, बल्कि कानूनी हैसियत मायने रखती है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के साल 2002 के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सगनूराम की संपत्ति पर अधिकार केवल पहली पत्नी की संतान का ही होगा।

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कोर्ट ने दूसरी शादी को क्यों अमान्य माना?

क्योंकि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी शून्य मानी जाती है।

क्या दूसरी पत्नी की संतान को संपत्ति में हिस्सा मिलेगा?

नहीं, कोर्ट ने साफ किया है कि दूसरी पत्नी या उसकी संतान का संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा।

यह मामला किससे जुड़ा था?

यह मामला पहली और दूसरी पत्नी की बेटियों के बीच संपत्ति विवाद से संबंधित था।