छत्तीसगढ़ नक्सलवाद मुक्त राज्य बनने की ओर अग्रसर, बस्तर में तेजी से बदलाव : मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ नक्सलवाद मुक्त राज्य बनने की ओर अग्रसर, बस्तर में तेजी से बदलाव : मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ नक्सलवाद मुक्त राज्य बनने की ओर अग्रसर, बस्तर में तेजी से बदलाव : मुख्यमंत्री साय
Modified Date: March 15, 2026 / 12:21 am IST
Published Date: March 15, 2026 12:21 am IST

रायपुर, 14 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास जताया है कि राज्य नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।

मुख्यमंत्री साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआईटी) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

साय ने कहा, ”हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सलवाद के प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।”

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘आदि परब’ का विषय ‘परंपरा से पहचान तक’ रखा गया है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएं दी।

अधिकारियों ने बताया कि इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में पांच करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटों की क्षमता वाले छात्रावास का लोकार्पण भी किया।

भाषा

संजीव रवि कांत


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