भारत को ‘विनाशकारी’ कम्युनिस्ट विचारधारा से छुटकारा पाना होगा : अमित शाह

भारत को ‘विनाशकारी’ कम्युनिस्ट विचारधारा से छुटकारा पाना होगा : अमित शाह

भारत को ‘विनाशकारी’ कम्युनिस्ट विचारधारा से छुटकारा पाना होगा : अमित शाह
Modified Date: February 8, 2026 / 09:10 pm IST
Published Date: February 8, 2026 9:10 pm IST

रायपुर, आठ फरवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि देश को जल्द से जल्द ‘‘विनाशकारी’’ कम्युनिस्ट विचारधारा से छुटकारा पाने की जरूरत है और उन्होंने नक्सलियों से हथियार डालने की अपील की।

शाह ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का ‘‘लाल कालीन’’ बिछाकर स्वागत करेगी।

नवा रायपुर में ‘ऑर्गनाइजर वीकली’ के ‘छत्तीसगढ़@25 शिफ्टिंग द लेंस’ शीर्षक से आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि माओवादी समस्या को विकास की कमी से नहीं जोड़ा जा सकता और न ही इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा माना जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘वामपंथी उग्रवाद की समस्या एक विचारधारा से प्रेरित चुनौती है।’’

शाह ने कहा कि भारत की जनता को इस विचारधारा की सच्चाई को समझना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जहां कहीं भी कम्युनिस्ट सत्ता में रहे, वे विकास नहीं ला सके। कम्युनिस्ट विचारधारा विनाश की विचारधारा है और देश को इससे तुरंत छुटकारा पाना आवश्यक है।’’

शाह ने कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में अब कम्युनिस्ट विचारधारा का कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘त्रिपुरा और बंगाल में अब इसका अस्तित्व नहीं है। केरल में यह कुछ हद तक मौजूद है; हालांकि, तिरुवनंतपुरम से लोगों ने बदलाव की शुरुआत कर दी है।’’

उन्होंने माओवादियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती और आत्मसमर्पण करने वालों का ‘‘लाल कालीन’’ बिछाकर स्वागत करेगी।

वामपंथी उग्रवाद पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि माओवादी समस्या का सही आकलन करने में विफलता भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।

शाह ने कहा कि कुछ विचारकों ने यह गलतफहमी फैलाई है कि माओवादी समस्या विकास से जुड़ी है और यह कानून-व्यवस्था का मुद्दा है।

अपनी बात साबित करने के लिए गृह मंत्री ने 1980 के दशक के विकास आंकड़ों का हवाला दिया, जब तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्य प्रदेश), आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती जिलों में माओवादी समस्या उभरी और फैली थी।

उन्होंने कहा, ‘‘उस समय, (छत्तीसगढ़ के) बस्तर से ज्यादा पिछड़े हुए 100 से अधिक जिले थे। अगर समस्या की जड़ विकास है, तो जब समस्या बढ़ी, तो उन 100 जिलों में क्यों नहीं बढ़ी जो बस्तर से ज्यादा पिछड़े हुए थे? कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था का मामला कहते हैं। मैं इससे भी सहमत नहीं हूं।’’

शाह ने बताया कि माओवादी समस्या के उभरने से पहले, बस्तर में कानून-व्यवस्था के आंकड़े बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से कहीं बेहतर थे।

शाह ने कहा, ‘‘इसका कानून-व्यवस्था और विकास से कोई लेना-देना नहीं है। मैं किसी से भी बहस कर सकता हूं तथा तथ्यों और सबूतों से यह साबित कर सकता हूं कि यह एक विचारधारा की समस्या है। जो लोग कहते हैं कि ये कोई विचारधारा की समस्या नहीं है, उन्हें समझाना चाहिए कि इस आंदोलन का नाम माओवाद क्यों रखा गया। क्योंकि इस विचारधारा में यह विश्वास है कि समस्याओं का समाधान बंदूक की नली से निकलता है।’’

उन्होंने कहा कि यह विचारधारा भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है, जिसमें हर समस्या का समाधान बहस और लोकतंत्र के जरिए निकलता है।

शाह ने कहा कि उन्हें यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि अगर बस्तर माओवादी समस्या से प्रभावित नहीं होता, तो यह देश का सबसे विकसित जिला होता।

नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई की प्रशंसा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इससे प्रभावित 90 प्रतिशत इलाका मुक्त हो गया है और 31 मार्च तक इस समस्या को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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