देखिए, खरसिया विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

देखिए, खरसिया विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

देखिए, खरसिया विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड
Modified Date: November 29, 2022 / 08:12 pm IST
Published Date: May 29, 2018 1:58 pm IST

रायपुर। विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड में आज हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आने वाले खरसिया विधानसभा क्षेत्र की। आजादी के बाद से ही सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। पहले कांग्रेस के कद्दावर नेता नंद कुमार पटेल यहां से 22 साल तक लगातार विधायक रहे और अब उनके बेटे उमेश पटेल क्षेत्र का प्रतिनिधि कर रहे हैं।

मुद्दों की बात की जाए तो उमेश पटेल इस इलाके में विकास करने का दावा करते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। खरसिया में बेरोजगारी भी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। बरगढ़ में मांड नदी पर डैम की मांग भी अधूरी है। वहीं कुछ दूसरी बुनियादी समस्याएं भी यहां नेताओं की कड़ी परीक्षा लेने वाली हैं।

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ये नजारे और ये नाराजगी बताने के लिए काफी हैं कि खरसिया में चुनाव से पहले विरोध के स्वर उठने लगे हैं। खरसिया में पिछले 22 सालों से कांग्रेस का कब्जा है। यहां की जनता पहले नंद कुमार पटेल को अपना जनप्रतिनिधि चुनती रही। वहीं अब उनके बेटे उमेश पटेल पर भरोसा जताया। वर्तमान विधायक इलाके में सक्रिय नेता तो माने जाते हैं। लेकिन उनके खिलाफ लोगों का ये गुस्सा बतलाता है कि इलाके में सब कुछ ठीक नहीं है। सच्चाई जानने के लिए हम खरसिया विधानसभा के मुरारीपाली गांव पहुंचे। यहां के लोगों से बातचीत की तो उनका दर्द सामने आ ही गया।

खरसिया यूं तो तेजी से औद्योगिक क्षेत्र के रुप में विकसित हो रहा है, लेकिन समस्याएं भी बढती जा रही हैं।।औद्योगिक मंदी की वजह से बडी संख्या में यहां के युवा बेरोजगार हुए हैं और रोजगार की आस में भटक रहे हैं। उद्योगों के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण के दौरान बडे पैमाने पर आदिवासियों की जमीनों की फर्जी खरीदी बिक्री के मामले सामने आए हैं, जिसमें पीड़ित किसानों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। खस्ताहाल सडकें और उद्योगों की वजह से बढता प्रदूषण भी यहां की एक बडी समस्या है। बिलासपुर-खरसिया एनएच का निर्माण होने की वजह से सडकें खुदी हुई है, जिसकी वजह से लोग धूल और प्रदूषण से परेशान हैं। खरसिया के बरगढ क्षेत्र में मांड नदी पर डैम की मांग भी आज तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए काफी दिक्कतें हो रही हैं। दूसरी बुनियादी सुविधाओँ की बात करें तो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओँ का भी बुरा हाल है।

वहीं शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से नहीं होने का आरोप भी लोग लगाते आए हैं। जाहिर है खरसिया विधानसभा क्षेत्र का एक सिरे से दूसरे सिरे तक दौरा करने के बाद हमारी टीम को समझ आ गया कि आने वाले चुनाव में नेताओं को यहां कैसे दहकते सवालों का सामना करना पड़ेगा।

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सियासी समीकरणों की बात की जाए तो हर चुनाव में यहां नतीजा एक  ही रहता है। कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव जीतते हैं और बीजेपी हारती है। आजादी के बाद से ही कांग्रेस इस सीट पर बीजेपी को शिकस्त दे रही है। वो भी तब जब खरसिया बीजेपी के पितृ पुरुष लखीराम अग्रवाल का गढ़ रहा है और एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ बीजेपी की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल की इस इलाके मे गहरी पैठ है। बावजूद इसके खरसिया में बीजेपी का जीत का खाता नहीं खुला है।

खरसिया विधानसभा में नंद कुमार पटेल के शहादत के बाद भले उनके बेटे उमेश पटेल राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं। लेकिन खरसिया की राजनीति में उनकी मौजूदगी आज भी महसूस की जा सकती है। उमेश पटेल के कार्यालय में मौजूद इस कुर्सी पर रखी नंद कुमार की तस्वीर इसकी एक बानगी है। इतना ही नहीं विधायक उमेश पटेल अपने पिता की कुर्सी पर न बैठकर बगल में रखे सोफे पर बैठकर ही अपना सारा कामकाज करते हैं और उनसे मिलने आई जनता की फरियाद सुनते हैं।

उमेश पटेल इस इलाके में सक्रिय विधायक के रुप में जाने जाते हैं। वैसे खरसिया सीट पर शुरू से पटेल परिवार का दबदबा रहा है। यहां से नंद कुमार पटेल 5 बार विधायक रहे  और 22 सालों तक सीट पर काबिज रहे। लेकिन 2013 में जीरम हमले में उनकी मौत के बाद उमेश पटेल को कांग्रेस ने यहां से टिकट दिया और वो 35 हजार वोट से अधिक वोटों से जीतकर नया इतिहास बनाया।  प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष की बागडोर संभालने के बाद अब उमेश पटेल का कद भी इस विधानसभा के साथ साथ पूरे प्रदेश में बढ़ा है।

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वहीं दूसरी ओर बीजेपी की बात करें तो खरसिया में अभी भी उसका जीत का खाता नहीं खुला है। कभी महिला प्रत्याशी तो कभी बाहरी प्रत्याशी होने की वजह से बीजेपी को इस सीट पर करारी शिकस्त मिलती रही है। उमेश पटेल की सक्रियता को देखते हए पार्टी इस बार यहां से किसी मजबूत प्रत्याशी को मैदान में उतार सकती है। सियासी जानकार भी मानते हैं कि अगर बीजेपी इस बार मजबूत कैंडिडेट को टिकट देती है तो इस सीट पर बराबरी का मुकाबला हो सकता है।

रायगढ़ जिले की सबसे अहम विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है खरसिया। यहां 40 फीसदी आबादी आदिवासियों की है और उनका दिल जीते बिना यहां फतह करना इतना आसान नहीं है। इस बात को शायद बीजेपी भी बखूबी समझ गई है। यही वजह है कि पार्टी ने सीट पर मेहनत शुरु कर दी है।

दावेदारों की बात की जाए तो कांग्रेस में विधायक उमेश पटेल का दूसरी पारी खेलना लगभग तय है.. दूसरी ओर बीजेपी के सामने चुनौती है कि वो जीतने वाले प्रत्याशी को ही टिकट दें। वैसे बीजेपी इस बार पीएम नरेन्द्र मोदी के मैजिक और रमन सरकार की योजनाओं के बलबूते यहां मैदान में उतरेगी। लिहाजा ये तय है कि इस सीट पर बीजेपी किसी मजबूत व योग्य केंडीडेट को मैदान में उतारेगी। लेकिन दावेदारों की लंबी फेहिरस्त पार्टी की मुश्किल बढ़ा सकती है। 

खरसिया की फिजाओँ में इन दिनों राजनीति का रंग चढ़ा हुआ है। हर नेता अपने-अपने तरीके से जनता का दिल जीतना चाहता है। वैसे तो यहां की जनता कांग्रेस को पिछले 22 सालों से कांग्रेस पर भरोसा जताती आई है और पिछले चुनाव में जीरम कांड की सहानुभूति की लहर में उमेश पटेल यहां 35 हजार से अधिक वोटों से जीते थे। 2018 के सियासी महासमर में उमेश पटेल एक बार फिर कांग्रेस के सबसे प्रबल दावेदार हैं और वो दूसरी पारी में जीत हासिल करने के लिए आश्वस्त नजर आ रहे हैं

वहीं दूसरी ओर खरसिया में हार का सिलसिला तोड़ने की कोशिश में लगी बीजेपी काफी सक्रिय नजर आ रही है। खरसिया प्रदेश के नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल का गृह इलाका है। बावजूद इसके बीजेपी के प्रत्याशी का यहां नहीं जीत पाने में नाकाम रहे हैं। मगर इस बार नए जोश के साथ वो विधायक उमेश पटेल पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए सीट पर जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। भारतीय जनता पार्टी इस बार उमेश पटेल के खिलाफ अघरिया समाज के कैंडिडेट को मौका दे सकती है। ऐसे में नरेश पटेल पार्टी से टिकट के प्रबल दावेदार हैं। फिलहाल वो जिला पंचायत उपाध्यक्ष हैं और उमेश पटेल के गृह ग्राम नंदेली सहित आसपास के 29 गांवों में जीत दर्ज कर अपना लोहा मनवा चुके हैं। लिहाजा नरेश पटेल भी चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। उनका कहना है कि अगर पार्टी मौका देती है तो चुनाव जरूर लड़ेंगे।

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नरेश पटेल के अलावा खरसिया में बीजेपी से कई नेता टिकट की मांग कर रहे हैं। इस सूची मे जिलाध्यक्ष रह चुके राजेश शर्मा का नाम भी शामिल हैं। वहीं विजय अग्रवाल और साहू समाज से महेश साहू भी टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं। इसके अलावा दावेदारो में नगर पालिका खरसिया के अध्यक्ष कमल गर्ग, श्रीचंद रावलानी, मंजुल दीक्षित जैसे नामों की चर्चा है। दावेदारों की लंबी फेहरिस्त देखकर लगता है कि खरसिया विधानसभा में इस बार घमासान मचना तय है।

कुल मिलाकर खरसिया में भले बीजेपी इस बार कांग्रेस को हराने का दावा करे लेकिन दावेदारों की लंबी कतार उसे कांग्रेस के सामने कमजोर करती है। ऐसी स्थिति में पार्टी के सामने सही प्रत्याशी को चुनने की चुनौती होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो उसके लिए बगावत से बच पाना आसान नहीं होगा।

वेब डेस्क, IBC24

 


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