7 फेरे…8 साल…एक खून! दिलचस्प है सनसनीखेज खूनी वारदात
7 फेरे...8 साल...एक खून! दिलचस्प है सनसनीखेज खूनी वारदात
जांजगीर-चांपा: उनके सात फेरों को आठ साल हो गए थे…उनके खुशियों के आंगन में सात साल की एक परी खिलखिलाती थी, लेकिन एक दिन खुशियों के इस घरौंदे में शक ने दबे पांव दस्तक दी। फिर क्या मांग के सिंदूर को सुहाग से सितमगर बनने में देर नहीं लगी। जांजगीर जिले में हुई सनसनीखेज खूनी वारदात के बाद इस गुनाह पर पर्दा डालने की कोशिश भी बड़ी दिलचस्प है।
Read More: भूपेश सरकार ढाई साल! ढाई साल में कितना बदला छत्तीसगढ़?
चौदह जून की रात करीब साढ़े दस बजे पंतोरा-कोरबा रोड में फॉरेस्ट बैरियर के पास खिसोरा गांव के छाता चौराहे में ये कार खड़ी मिली। कार की को-ड्राइविंग सीट में एक महिला की लाश थी, जिसका गला नायलोन की रस्सी से सीट पर बंधा था। पुलिस को सूचना मिली और जब वो मौके पर पहुंची, तो पता चला कि बिलासपुर में रहने वाला देवेंद्र सोनी अपनी 28 साल की पत्नी दीप्ति सोनी के साथ कोरबा गया था। जहां से लौटते वक्त चार लुटेरों ने उन पर हमला किया और कनपटी पर पिस्टल अड़ाकर लैपटॉप, कैश और मोबाइल लूट लिए। लुटेरों ने उसकी पत्नी दीप्ति की हत्या कर दी और देवेंद्र के हाथ-पैर बांधकर फरार हो गए।
मृतका दीप्ति के पति देवेंद्र ने पुलिस को जो कहानी बताई, वो पुलिस के गले नहीं उतरी। क्योंकि लुटेरों के पास पिस्टल थी, तो उन्होंने रस्सी बांधकर गला क्यों घोंटा? दीप्ति को मार दिया तो फिर पति देवेंद्र को क्यों छोड़ दिया? पुलिस का शक और गहरा हो गया, जब मोबाइल के कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रेस हुआ। जांच में ये बात भी सामने आई कि पिछले तीन साल से दीप्ति के मायके से उसने सारे संबंध तोड़ लिए थे। वारदात वाले दिन ही दीप्ति के एकाउंट का नामिनी के रुप में उसके पति का नाम दर्ज हुआ था।
पुलिस ने जब देवेंद्र सोनी उर्फ दीपक को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो हत्याकांड की पूरी कहानी सामने आ गई। देवेंद्र और दीप्ति की शादी आठ साल पहले हुई थी। दोनों की सात साल की बेटी भी है। लेकिन देवेंद्र अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। लिहाजा उसने अपने घर में काम करने वाले प्रदीप सोनी और उसकी पत्नी को साजिश में शामिल कर अपनी पत्नी के मर्डर का प्लान बनाया।
हमसफर की जिंदगी सफर में ही खत्म कर देवेंद्र अपने शक की आग बुझाना चाहता था। लेकिन खूनी जुर्म के बाद गुनाहों पर पर्दा डालते हुए वो भूल गया था कि बस एक सुराग और जालिम खल्लास!
Read More: व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं पं. युगल किशोर शुक्ल: प्रोफेसर संजय द्विवेदी

Facebook


