नकली रेमडेसिविर…एक्शन में सरकार! लेकिन ये घटनाएं आखिर रुक क्यों नहीं रही हैं?
नकली रेमडेसिविर...एक्शन में सरकार! लेकिन ये घटनाएं आखिर रुक क्यों नहीं रही हैं?
भोपाल: मध्यप्रदेश में तमाम सख्ती के बावजूद आज भी कोरोना मरीजों की जान बचाने वाली दवाओं की बोली लग रही है। प्रशासन की नाक के नीचे कालाबाजारी हो रही है। सरकार दावे तो कर रही है कि ऐसे आरोपी ताउम्र सलाखों के पीछे रहेंगे, लेकिन मध्यप्रदेश के बड़े शहरों से रोज रेमडिसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी की खबरें रिपोर्ट हो रहीं हैं। खुद गृह मंत्री, मुख्यमंत्री ऐसे मामलों की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन ये घटनाएं आखिर रुक क्यों नहीं रही हैं?
अस्पताल और दवाई की दुकानें, जहां रेमेडिसिविर के नाम पर बेचा जाता था जानलेवा जहर। इस जहर को मध्यप्रदेश में बेचने वाला शख्स गुजरात का रहने वाला सुनील मिश्रा है, जिसने जबलपुर में भगवती फार्मा के जरिए सरबजीत मोखा को एकमुश्त नकली रेमेडिसिविर बेचे तो इंदौर में अपने नेटवर्क के जरिए करीब 500 इंजेक्शन खपा दिए। अपनों की जान बचाने के लिए जो मजबूर लोग मुहंमांगे दाम देने को तैयार हैं उनके लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर,जबलपुर ही नहीं छोटे छोटे शहरों में भी दलाल आज भी सक्रिय है जिनकी तेजी से धरपकड़ हो रही है। अभी तक रेमेडिसिविर की कालाबाजारी करने वाले 75 लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और 6 पर चोरबाजारी कानून लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि ऑक्सीजन कालाबाज़ारी में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, इसके अलावा सभी कलेक्टर और एसपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। वैसे मुख्यमंत्री खुद ऐसे लोगों को पिशाच तक कह चुके हैं।
रेमेडिसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार की तरफ से काफी कोशिशें हो रही है लेकिन कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आरोप है। देश में सबसे ज्यादा रेमड़ेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी व नक़ली इंजेक्शन की सप्लाई के मामले मध्यप्रदेश में ही सामने आये है , प्रदेश में एक नया रेमड़ेसिविर माफिया पैदा हो गया है , भाजपा से जुड़े हुए लोगों के नाम रोज जीवन रक्षक दवाइयों व उपकरणो की कालाबाज़ारी में सामने आ रहे हैं ?(ग्राफिक्स आऊट) दरअसल मरीजों की संख्या के मुताबिक रेमेडिसिविर की कमी सप्लाई न होना भी सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द है और कांग्रेस इस मुद्दे को उठाने में जरा भी चूक नहीं कर रही है।
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रेमेडिसिविर वितरण को लेकर सरकार ने सीधे इसे अस्पताल में पहुंचा रही है लेकिन कुछ अस्पतालों में काम करने वाले ही इसे चुराकर ज्यादा पैसे में बेच रहे हैं। इसके अलावा गुजरात से आई नकली रेमेडिसिविर का डेटा इकट्ठा करने में पुलिस को परेशानी हो रही है क्योंकि आरोपी ने लोगों को कम संख्या में ये इंजेक्शन बांटे है इस वजह से पता नहीं चल पा रहा है कि इस जहर का शिकार कितने लोग हुए हैं।

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