गत 11 वर्षों में 50 लाख कृत्रिम जल संग्रह संरचनाएं और 70,000 झीलें बनाई गईं : प्रधानमंत्री मोदी
गत 11 वर्षों में 50 लाख कृत्रिम जल संग्रह संरचनाएं और 70,000 झीलें बनाई गईं : प्रधानमंत्री मोदी
नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम में कहा कि गत पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ के तहत देश भर में लगभग 50 लाख कृत्रिम जल संग्रह संरचनाएं बनाई गई हैं और ‘अमृत सरोवर अभियान’ के तहत 70,000 झीलें निर्मित की गई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के कई हिस्सों में गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों के बीच काफी जागरूकता पैदा की है, जिसके तहत देश भर में लगभग 50 लाख कृत्रिम जल संग्रह संरचनाएं बनाई गई हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि जल संकट से निपटने के लिए अब हर गांव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर पुराने तालाबों की सफाई की जा रही है, अन्य जगहों पर वर्षा जल के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देश भर में लगभग 70,000 ‘अमृत सरोवर’ (झीलें) बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्षा ऋतु के आगमन से पहले ही इन झीलों की सफाई शुरू हो चुकी है। आज मैं आपके साथ कुछ प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा करना चाहूंगा। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण कितना व्यापक हो सकता है।’’
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का उदाहरण दिया, जहां किसानों ने एक सरल लेकिन कारगर उपाय अपनाया। उन्होंने अपने खेतों में छोटे-छोटे जल पुनर्भरण तालाब और सोखने वाले गड्ढे बनाए, जिससे बारिश का पानी खेतों में ही जमा रहता है और धीरे-धीरे जमीन में रिस जाता है। इस क्षेत्र के 1,200 से अधिक किसानों ने इस पद्धति को अपनाया है और गांव के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मंचरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव में लोग जल समस्या के समाधान के लिए एकजुट हुए हैं और 400 परिवारों ने अपने घरों में जल संचयन के लिए गड्ढे बनाए हैं तथा जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन शुरू किया है।
मोदी ने कहा कि इससे गांव के भूजल स्तर में सुधार हुआ है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में काफी कमी आई है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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