सभी केंद्रीय विद्यालयों में छठी और नौवीं कक्षा में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य

सभी केंद्रीय विद्यालयों में छठी और नौवीं कक्षा में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य

सभी केंद्रीय विद्यालयों में छठी और नौवीं कक्षा में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य
Modified Date: June 13, 2026 / 03:16 pm IST
Published Date: June 13, 2026 3:16 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तीसरी भाषा प्रारूप लागू करने के तहत अपने सभी विद्यालयों में छठी और नौवीं कक्षा में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन रखना अनिवार्य कर दिया है।

शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त निकाय केवीएस ने 29 मई को जारी एक परिपत्र में कहा कि सभी केंद्रीय विद्यालयों को त्रि-भाषा प्रारूप (आर3) के लिए विद्यार्थियों और अभिभावकों से विकल्प लेने की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।

परिपत्र में कहा गया कि तीसरी भाषा संस्कृत या अनुसूची में शामिल भाषाओं में से कोई क्षेत्रीय/राज्य भाषा होनी चाहिए। यह भाषा आर1 यानी हिंदी और आर2 यानी अंग्रेजी से अलग होगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘विद्यार्थी अपनी पसंद के आधार पर संस्कृत या क्षेत्रीय भाषा में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। केवल यह व्यवस्था की गई है कि स्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चों की सुविधा के लिए हर विद्यालय में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन होना चाहिए।’’

केवीएस ने विद्यालय स्तर पर कर्मचारियों की आवश्यकता का फिर से आकलन करने के लिए ‘समागम’ पोर्टल के जरिये विद्यार्थियों के आर3 विकल्पों का डेटा भी मांगा है।

परिपत्र में कहा गया कि सभी विद्यालयों को छठी और नौवीं कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों द्वारा चुनी गई तीसरी भाषा के आधार पर संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं के संयुक्त सेक्शन का डेटा अलग-अलग उपलब्ध कराना होगा।

परिपत्र में कहा गया, ‘‘कक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए समान आर3 भाषा चुनने वाले विद्यार्थियों को एक ही सेक्शन में रखा जाना चाहिए।’’

इसमें भाषा सेक्शन की व्यवस्था समझाने के लिए उदाहरण भी दिए गए हैं और कहा गया है कि संस्कृत एवं क्षेत्रीय भाषा के सेक्शन की संख्या विद्यार्थियों के पंजीकरण पर निर्भर करेगी। जिन विद्यालयों में एक सेक्शन है, उनमें संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा के अलग-अलग बैच बनाए जा सकते हैं, बशर्ते प्रत्येक बैच में कम से कम 15 विद्यार्थी हों।

दो सेक्शन वाले विद्यालयों में संस्कृत का एक और क्षेत्रीय भाषा का एक सेक्शन रखा जा सकता है, जबकि तीन सेक्शन वाले विद्यालयों में प्रधानाचार्य विद्यार्थियों द्वारा चुनी गई भाषा की संख्या के आधार पर संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा के सेक्शन का वितरण तय कर सकते हैं। हालांकि, परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक कक्षा में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन अनिवार्य होगा।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पिछले महीने कहा था कि उसने एक जुलाई से नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कम से कम दो मूल भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है।

यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप सीबीएसई की अध्ययन योजना को ढालने का हिस्सा है।

बोर्ड द्वारा 15 मई को जारी परिपत्र के अनुसार, विदेशी भाषा चुनने वाले विद्यार्थी दो मूल भारतीय भाषाओं का अध्ययन करने के बाद तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में विदेशी भाषा का चयन कर सकते हैं।

सीबीएसई ने कहा कि सीखने पर ध्यान बनाए रखने और विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव कम करने के लिए दसवीं कक्षा के स्तर पर आर3 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

बोर्ड ने यह भी कहा कि आर3 की अलग पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध होने तक नौवीं कक्षा के विद्यार्थी चुनी गई भाषा की आठवीं कक्षा की आर3 पाठ्यपुस्तकें (2026-27 संस्करण) इस्तेमाल करेंगे।

भाषा

सिम्मी सुरेश

सुरेश


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