अम्मा विवाद और गहराया: कलाकारों के एक समूह ने श्वेता मेनन पर नए आरोप लगाए
अम्मा विवाद और गहराया: कलाकारों के एक समूह ने श्वेता मेनन पर नए आरोप लगाए
कोच्चि, चार जुलाई (भाषा) एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (अम्मा) में जारी विवाद शनिवार को और गहरा गया। संगठन के संचालन के लिए गठित तदर्थ समिति के कामकाज पर अदालत द्वारा रोक लगाए जाने के एक दिन बाद कुछ अभिनेत्रियों ने पूर्व अध्यक्ष श्वेता मेनन पर नए आरोप लगाए।
ये आरोप अभिनेत्री माला पार्वती, अंसिबा हसन, उषा हसीना और माया विश्वनाथ ने यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में लगाए।
पार्वती ने आरोप लगाया कि संगठन के नेतृत्व के कुछ फैसलों पर सवाल उठाने के कारण अंसिबा हसन को संगठन के भीतर ‘‘सांप्रदायिक’’ और ‘‘जिहादी’’ करार देने की कोशिश की गई।
उन्होंने दावा किया, ‘‘अंसिबा को निशाना बनाया गया और उन्हें सांप्रदायिक तथा जिहादी के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।’’
पार्वती ने यह भी आरोप लगाया कि श्वेता मेनन ने ‘अम्मा’ को एक राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप चलाने की कोशिश की।
उन्होंने एक वीडियो साक्षात्कार का भी जिक्र किया, जिसमें भाजपा नेता पद्मजा मेनन ने कथित तौर पर संगठन को अदाणी समूह की ओर से 15 करोड़ रुपये का दान मिलने की संभावना का उल्लेख किया था।
पार्वती ने संवाददाता सम्मेलन में एक वीडियो प्रदर्शित करने के बाद कहा, ‘‘एक नेता कह रही हैं कि श्वेता की साख के आधार पर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी से 15 करोड़ रुपये लाए जा सकते हैं। हमें किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी से 15 करोड़ रुपये नहीं चाहिए।’’
पार्वती ने यह भी आरोप लगाया कि श्वेता मेनन और अभिनेता-विधायक रमेश पिशारोडी के बीच हुई बातचीत की एक ऑडियो को राजनीतिक मकसद से मीडिया में जारी किया गया और दावा किया कि बातचीत के कुछ हिस्सों को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया गया।
अंसिबा हसन ने आरोप लगाया कि पूर्व कार्यकारिणी के कार्यकाल में हुई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं ही संगठन के प्रशासनिक संकट का वास्तविक कारण हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इन्हीं वित्तीय अनियमितताओं के कारण नेतृत्व कार्यकारिणी को तदर्थ समिति में बदलने के लिए तैयार नहीं था।’’
उषा हसीना ने आरोप लगाया कि कार्यकारिणी के भीतर अहम का टकराव और निहित स्वार्थों ने संगठन को संकट में डाल दिया है।
अभिनेत्रियों ने कहा कि वे संगठन के माध्यम से किसी भी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगी।
इस बीच, श्वेता मेनन ने शनिवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में आरोपों का सीधे तौर पर जवाब नहीं दिया, लेकिन वरिष्ठ अभिनेता ममूटी और मोहनलाल का उनका समर्थन करने के लिए आभार जताया।
उन्होंने लिखा, ‘‘मैं ममूक्का और ललेट्टन का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इस्तीफा न दूं, अपने रुख पर कायम रहूं और इस लड़ाई को जारी रखूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ‘अम्मा’ के उन सभी सदस्यों की भी आभारी हूं, जिन्होंने मेरा साथ दिया।’’
एर्णाकुलम की एक अदालत द्वारा ‘अम्मा’ के कामकाज के संचालन के लिए गठित तदर्थ समिति के कार्य पर अंतरिम रोक लगाने के एक दिन बाद ये नए आरोप सामने आए है।
यह समिति संगठन की आम सभा द्वारा पूर्व कार्यकारिणी को हटाए जाने के बाद गठित की गई थी।
अदालत ने यह अंतरिम रोक श्वेता मेनन की याचिका पर लगाई। मेनन का कहना था कि तदर्थ समिति का गठन संगठन के उपनियमों के विपरीत है।
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
अम्मा की पूर्व अध्यक्ष श्वेता मेनन ने अदालत का रुख करते हुए दलील दी थी कि मलयालम फिल्म उद्योग के कलाकारों के कल्याण के लिए गठित इस धर्मार्थ संगठन के उपनियमों के विपरीत तदर्थ समिति का गठन किया गया है।
इक्कीस जून को यहां आयोजित ‘अम्मा’ की आम सभा की बैठक में सदस्यों ने कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मौजूदा कार्यकारिणी को हटाने का फैसला किया था। साथ ही, अगले चुनाव होने तक संगठन का कामकाज संभालने के लिए पिशारोडी की अध्यक्षता में एक तदर्थ समिति का गठन किया गया था।
अपनी याचिका में श्वेता मेनन ने दलील दी कि संगठन के उपनियमों के अनुसार नई कार्यकारिणी के चुने जाने तक मौजूदा कार्यकारिणी को ही पद पर बने रहना चाहिए।
आम सभा की बैठक के बाद मेनन की अध्यक्षता वाली कार्यकारिणी के कई सदस्य पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके थे।
भाषा राखी प्रशांत
प्रशांत

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