कृत्रिम मेधा को मानवीय रचनात्मकता बढ़ाना चाहिए : सिद्धरमैया

कृत्रिम मेधा को मानवीय रचनात्मकता बढ़ाना चाहिए : सिद्धरमैया

कृत्रिम मेधा को मानवीय रचनात्मकता बढ़ाना चाहिए : सिद्धरमैया
Modified Date: February 27, 2026 / 04:59 pm IST
Published Date: February 27, 2026 4:59 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

बेंगलुरु, 27 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा को मानवीय रचनात्मकता को बढ़ाने का एक औजार बने रहना चाहिए, न कि उसे कलाकारों का स्थान लेना चाहिए।

उन्होंने ‘एवीजीसी-एक्सआर’ क्षेत्र में नैतिक उपयोग, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और उचित मुआवजे पर जोर दिया।

उन्होंने उद्योग जगत की हस्तियों से मौलिक सामग्री में निवेश करने, शिक्षण संस्थानों से पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण करने, युवा रचनाकारों से निडर होकर सपने देखने और वैश्विक भागीदारों से कर्नाटक के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।

उन्होंने यहां ‘इवॉल्यूशन रीलोडेड’ विषयक सातवें ‘जीएएफएक्स-गेम्स, एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स’ सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि ‘एवीजीसी-एक्सआर’ क्षेत्र के प्रति कर्नाटक की प्रतिबद्धता हालिया या प्रतिक्रियात्मक नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हम (इस क्षेत्र में) अग्रणी रहे हैं।’’

सिद्धरमैया ने याद दिलाया कि 2017 में, कर्नाटक भारत का पहला ऐसा राज्य बना, जिसने (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स) के लिए एक समर्पित ‘एवीजीसी’ नीति लागू की।

उन्होंने कहा,‘‘यह निर्णय दूरदर्शिता से प्रेरित था, क्योंकि यह माना गया था कि पाठ्य या कथ्य सामग्री सृजन (कंटेंट क्रिएशन) कोड निर्माण जितना ही शक्तिशाली हो जाएगा।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आज जीएएफएक्स अगली बड़ी क्रांति का प्रतिनिधित्व करता है। गेम्स, एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स क्षेत्र अब एक छोटा रचनात्मक उद्योग नहीं रह गया है। डिजिटल क्रांति, इमर्सिव मीडिया, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, ई-स्पोर्ट्स और एक्सटेंडेड रियलिटी के युग में, जीएएफएक्स इस बात को आकार दे रहा है कि मानव दुनिया कहानियों, संस्कृति, शिक्षा और यहां तक ​​कि शासन का अनुभव कैसे करती है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 2024-2029 के लिए अपनी तीसरी ‘एवीजीसी-एक्सआर’ नीति लागू कर रही है, जो इस क्षेत्र के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी एवीजीसी-एक्सआर नीति ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने के लिए प्रोत्साहन, अवसंरचनात्मक सहायता, कौशल विकास पहल, इनक्यूबेशन सिस्टम और संस्थागत सहयोग प्रदान किया है।’’

कृत्रिम मेधा पर, सिद्धरमैया ने कहा कि यह ‘कंटेंट प्रक्रियाओं’ को बदल रही है और उत्पादकता बढ़ा रही है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इसे एक औजार के रूप में ही रहना चाहिए, न कि मानवीय कल्पना का विकल्प।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी को मानवीय क्षमता को बढ़ाना चाहिए, न कि उसे मिटाना चाहिए। कहानी कहने की आत्मा मानवीय भावना है, जिसे कोई भी एल्गोरिदम पूरी तरह से उसी रूप में नहीं पेश कर सकता।’’

भाषा राजकुमार दिलीप

दिलीप


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