कारीगर और बुनकर राष्ट्र की जीवंत विरासत का बेहतरीन उदाहरण : राष्ट्रपति
कारीगर और बुनकर राष्ट्र की जीवंत विरासत का बेहतरीन उदाहरण : राष्ट्रपति
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को पूर्वोत्तर के बुनकरों एवं कारीगरों को देश की जीवंत विरासत का एक बेहतरीन उदाहरण बताते हुये उनसे आग्रह किया कि वे इस अमूल्य परंपरा को नयी पीढ़ी तक पहुंचाएं।
पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों और बुनकरों के एक समूह ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।
राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ये कारीगर और बुनकर वही थे जिन्होंने 26 जनवरी को आयोजित ‘एट होम’ स्वागत समारोह के दौरान भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की विविध कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने तथा निमंत्रण किट तैयार करने में योगदान दिया था।
बयान में कहा गया है, ‘‘उदाहरण के लिए, नागालैंड के कारीगरों ने केले के रेशे और बांस का उपयोग करके टोकरियां बनाईं, असम के बुनकरों ने शॉल बनाए। मणिपुर के कारीगरों ने काली मिट्टी के बर्तन बनाए और सिक्किम के कारीगरों ने प्राकृतिक रेशों का उपयोग करके उत्पाद तैयार किए।’’
इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति के साथ इस संवाद के दौरान, कारीगरों और बुनकरों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन के लिए काम करने के अपने अनुभव साझा किए और अपनी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वे (कारीगर एवं बुनकर) राष्ट्र की जीवंत विरासत का बेहतरीन उदाहरण हैं और उनसे आग्रह किया कि वे इन अमूल्य परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएं।
असम, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कारीगरों और बुनकरों से परस्पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में प्राकृतिक सुंदरता का भंडार है।
मुर्मू ने कारीगरों और बुनकरों को सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उनका कलात्मक ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए कारीगरों और बुनकरों की सराहना की।
राष्ट्रपति के साथ इस मुलाकात के बाद सभी कारीगरों एवं बुनकरों ने अमृत उद्यान सहित राष्ट्रपति भवन का निर्देशित दौरा किया।
भाषा रंजन रंजन पवनेश
पवनेश

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