अरुणाचल मानवाधिकार आयोग ने शरणार्थी क्षेत्रों में बेहतर सड़क एवं बाढ़ नियंत्रण उपायों की सिफारिश की

अरुणाचल मानवाधिकार आयोग ने शरणार्थी क्षेत्रों में बेहतर सड़क एवं बाढ़ नियंत्रण उपायों की सिफारिश की

अरुणाचल मानवाधिकार आयोग ने शरणार्थी क्षेत्रों में बेहतर सड़क एवं बाढ़ नियंत्रण उपायों की सिफारिश की
Modified Date: June 22, 2026 / 09:16 pm IST
Published Date: June 22, 2026 9:16 pm IST

ईटानगर, 22 जून (भाषा) अरुणाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग (एपीएसएचआरसी) ने चांगलांग ज़िले के चकमा और हाजोंग शरणार्थी पुनर्वास क्षेत्रों में सड़क संपर्क में तत्काल सुधार और बाढ़ नियंत्रण उपायों को लागू करने की सिफ़ारिश की है।

राज्य मानवाधिकार आयोग ने सोमवार को मुख्यमंत्री पेमा खांडू को लिखे एक पत्र में कहा कि राज्य की मूल जनजातियों के जनसांख्यिकीय हितों की रक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसे हस्तक्षेप आवश्यक हैं कि ये समुदाय अपने निर्धारित पुनर्वास क्षेत्रों के भीतर ही रहें।

एपीएसएचआरसी के कार्यवाहक अध्यक्ष बामांग टैगो ने एक पत्र में, 12 और 13 जून को ज़िले के दियून और बोरदुमसा सर्कल में चकमा और हाजोंग बस्तियों के दौरे के दौरान सामने आई बातों का जिक्र किया है।

आयोग ने खराब सड़क और दिहिंग नदी के कारण बार-बार आने वाली बाढ़ को दो बड़ी चुनौतियां बताते हुए कहा कि इन पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।

उसने कहा कि कि इस इलाके का आर्थिक महत्व बढ़ने के बावजूद, पुनर्वास क्षेत्रों में सड़क संपर्क अब भी अपर्याप्त है।

आयोग ने कहा कि नामसाई और दियून के बीच लगभग 33 किलोमीटर की दूरी तय करने में सड़क की खराब हालत के कारण एक घंटे से ज़्यादा समय लगता है, जिससे इलाके में व्यापार, आवाजाही और समग्र विकास पर असर पड़ता है।

आयोग के अनुसार, बेहतर सड़कों से न केवल चांगलांग और नामसाई ज़िलों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा तैयारियों को भी मज़बूती मिलेगी, खासकर इसलिए क्योंकि दियून में दूसरी अरुणाचल प्रदेश इंडिया रिज़र्व बटालियन का मुख्यालय स्थित है।

पत्र में कहा गया है कि बेहतर कनेक्टिविटी से आपातकालीन स्थितियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े हालात के दौरान सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही तेज़ी से हो सकेगी।

ये सिफारिशें ऐसे समय में आई हैं, जब अरुणाचल प्रदेश में जनसांख्यिकीय संरक्षण, मूल निवासियों के अधिकारों और पुनर्वास क्षेत्रों के नियमन से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


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