बंगाल के शराब विक्रेताओं का अनधिकृत परिवहन शुल्क के रूप में 300 करोड़ रुपये वसूले जाने का आरोप
बंगाल के शराब विक्रेताओं का अनधिकृत परिवहन शुल्क के रूप में 300 करोड़ रुपये वसूले जाने का आरोप
(विशेस्वर मालाकार)
कोलकाता, 14 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के खुदरा शराब व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि 2022 एवं 2025 के बीच उनसे लगभग 300 करोड़ रुपये परिवहन शुल्क के रूप में वसूले गये जबकि राज्य की वितरक-डिपो आपूर्ति प्रणाली के अनुसार इस भुगतान की जिम्मेदारी वितरकों पर होती है।
आबकारी शुल्क विभाग से इस मामले की जांच की मांग करते हुए, ‘सोसाइटी फॉर द वेलफेयर ऑफ वेस्ट बंगाल फॉरेन लिकर लाइसेंस’ ने कहा कि राज्य सरकार की वितरक-डिपो प्रणाली के अनुसार वितरकों को अपने खर्च पर खुदरा विक्रेताओं के गोदामों तक शराब की आपूर्ति करनी होती है।
हालांकि आबकारी शुल्क आयुक्त को लिखे पत्र में कहा गया है कि नियमों के विपरीत, खुदरा विक्रेताओं से बीयर आपूर्ति के लिए प्रति मामला 10-13 रुपये परिवहन शुल्क के रूप में वसूले जा रहे हैं।
खुदरा विक्रेताओं के इस संगठन ने आरोप लगाया कि सदस्यों से परिवहन और डिलीवरी शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि वितरक-डिपो मॉडल के अनुसार उत्पादों की आपूर्ति खुदरा दुकानों तक वितरकों के खर्च पर होनी चाहिए।
इसने दावा किया कि ऐसे शुल्क बिना रसीद, बिल या किसी सहायक दस्तावेज के वसूले जा रहे हैं और खुदरा विक्रेताओं को अक्सर आपूर्ति में बाधा से बचने के लिए भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है।
सोसाइटी के सचिव, बिजोन कुमार पात्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अनुमानों और डिपो से भेजे गए माल के आंकड़ों के आधार पर, 2022 एवं 2025 के बीच बीयर, विदेशी शराब और देशी शराब की आपूर्ति से लगभग 300 करोड़ रुपये वसूली की गयी होगी।’’
उद्योग संगठन ने कहा कि इस प्रणाली के कारण पैसा सरकार के खजाने में जाने के बाद कुछ राजनीतिक पहुंच वाले व्यक्तियों को वित्तीय लाभ मिला।
हालांकि संगठन ने इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन उसने पहले भी तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान आबकारी शुल्क विभाग से शिकायत की थी, जिसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला था।
संगठन ने आबकारी शुल्क विभाग से इस मामले की जांच करने, कथित अनधिकृत परिवहन शुल्क की वसूली को रोकने और शराब वितरण ढांचे के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और निरंतरता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
पात्रा ने कहा, ‘‘वितरक-डिपो प्रणाली को आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने और खुदरा विक्रेताओं तक प्रभावी वितरण सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था। सदस्यों द्वारा परिवहन शुल्क को लेकर उठाई गई चिंताओं के मद्देनजर, हमने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे इस मामले की जांच करें, आवश्यक स्पष्टीकरण दें और पूरे राज्य में वितरण नीति का समान रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित करें।’’
भाषा
देवेंद्र राजकुमार
राजकुमार

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