बंगाल : ममता ने एसआईआर प्रक्रिया में अपनाई गई कार्यप्रणाली के बारे में सीईसी को फिर से पत्र लिखा
बंगाल : ममता ने एसआईआर प्रक्रिया में अपनाई गई कार्यप्रणाली के बारे में सीईसी को फिर से पत्र लिखा
कोलकाता, 31 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अपनाई गई कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण के बारे में शनिवार शाम को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को फिर से पत्र लिखा।
नये पत्र में बनर्जी ने अपने पिछले पत्र का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने कई ऐसे मुद्दों की ओर इशारा किया था, जिनसे न केवल लोगों को ‘अत्यधिक असुविधा और पीड़ा’ हुई है बल्कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान कम से कम 140 लोगों की मौत हो गई।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि एसआईआर की यह प्रक्रिया अधिनियम और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और मानवाधिकारों और बुनियादी मानवीय विचारों की पूर्ण अवहेलना करते हुए भी इसे लागू किया गया है।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में कहा, ‘‘ पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के प्रावधानों से परे अपनाई जा रही कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण के संबंध में आपको फिर से लिखना मेरी विवशता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में, भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार, निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 8,100 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों (एमओ) को तैनात किया है। इन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को निर्वाचन आयोग द्वारा एकतरफा तरीके से नियुक्त किया जा रहा है, जबकि उनके पास इस तरह के विशेषीकृत, संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण या सिद्ध विशेषज्ञता नहीं है।’’
बनर्जी ने कहा कि पुनरीक्षण के दौरान सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की भूमिका, कार्य और अधिकार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, मतदाता पंजीकरण नियम-1960 या मतदाता सूचियों को तैयार किया जाना और उनमें संशोधन को नियंत्रित करने वाले किसी अन्य वैधानिक उपकरण के तहत न तो परिभाषित हैं, न ही परिकल्पित और न ही अधिकृत हैं।
भाषा रवि कांत रवि कांत सुभाष
सुभाष

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