भवानीपुर : न्यायाधीश ने भाई के भाजपा से जुड़ाव का किया खुलासा, ईवीएम-सीसीटीवी संरक्षित रखने का आदेश
भवानीपुर : न्यायाधीश ने भाई के भाजपा से जुड़ाव का किया खुलासा, ईवीएम-सीसीटीवी संरक्षित रखने का आदेश
कोलकाता, 23 जून (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश गौरांग कांत ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव नतीजों को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के वकील से मंगलवार को कहा कि उनके (न्यायाधीश के) बड़े भाई भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हैं और वह इस बात की पूरी जानकारी देने के बाद ही मामले की सुनवाई करेंगे।
ममता बनर्जी की याचिका पर शुरुआती सुनवाई के बाद, न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने आदेश दिया कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों के मतदान कक्ष, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट मशीनों के चार मई के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।
जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई न्यायाधीश ने ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील कल्याण बनर्जी से कहा कि वह ‘‘यह बिल्कुल साफ कर देना चाहते हैं कि उनके बड़े भाई भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह (उनके भाई का भाजपा प्रवक्ता होना) याचिकाकर्ता के लिए चिंता की बात हो सकती है और वह ‘‘पूरी जानकारी देने के बाद ही सुनवाई करेंगे, ताकि ‘‘आपको बाद में कोई दिक्कत’’ न हो।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने अदालत से कहा कि उन्हें न्यायाधीश पर पूरा ‘भरोसा’’ है और उनके प्रति सम्मान भी। वकील ने कहा, ‘‘एक न्यायाधीश के तौर पर आपके प्रति मेरा भरोसा और सम्मान किसी अन्य बात पर निर्भर नहीं करता है।’’
अधिवक्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति कांत उच्च न्यायालय के सज्जन और विद्वान न्यायाधीशों में से एक हैं और उनका मानना है कि उनके (न्यायमूर्ति कांत के) लिए कोई भी मायने नहीं रखता, भले वह रिश्तेदार हो या नहीं।
कल्याण बनर्जी की दलीलों पर उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह भवानीपुर के सखावत मेमोरियल स्कूल में बने मतगणना केंद्रों के चार मई के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखे; जिसमें मतदान कक्ष के अंदर और बाहर का फुटेज भी शामिल है।
न्यायमूर्ति कांत ने भवानीपुर के सभी मतदान बूथों पर इस्तेमाल की गईं ईवीएम और इस क्षेत्र में इस्तेमाल की गईं सभी वीवीपैट मशीनों को भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
उन्होंने निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना सीसीटीवी फुटेज, ईवीएम और वीवीपैट से न तो छेड़छाड़ किया जाएगा, न ही उन्हें कहीं और भेजा, खोला या किसी भी तरह से इस्तेमाल किया जाएगा।
अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित सभी मतदान केंद्रों पर इस्तेमाल की गईं ईवीएम को याचिका का अंतिम निपटारा होने तक ज़िला निर्वाचन अधिकारी की अभिरक्षा में रखा जाएगा।
अदालत ने याचिका में प्रतिवादियों के वकील को निर्देश दिया कि वे चार हफ़्ते के भीतर विरोध में अपने हलफ़नामे दाखिल करें और उसके बाद चार हफ़्ते के भीतर याचिकाकर्ता जवाबी हलफ़नामी दाखिल करें।
अदालत ने कहा कि इस मामले पर 12 हफ़्ते बाद फिर से सुनवाई होगी।
ममता बनर्जी ने यह चुनाव याचिका भ्रष्टाचार, मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से हटाने, मतों की गिनती में गड़बड़ी और संविधान एवं ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के प्रावधानों का पालन न करने के आरोपों पर दायर की थी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी पर 15,105 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।
भाषा सुरेश नरेश
नरेश

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