बीजद ने ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष से आठ विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया

बीजद ने ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष से आठ विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया

बीजद ने ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष से आठ विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया
Modified Date: April 27, 2026 / 07:40 pm IST
Published Date: April 27, 2026 7:40 pm IST

भुवनेश्वर, 27 अप्रैल (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) ने सोमवार को ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी से आठ निलंबित विधायकों को अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया, क्योंकि वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं और हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के दौरान और बाद में पार्टी के सामूहिक निर्णय का भी उल्लंघन किया है।

विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक के नेतृत्व में बीजद विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा में अध्यक्ष के कक्ष में उनसे मुलाकात की और एक याचिका सौंपी।

मल्लिक ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने अध्यक्ष से उन आठ विधायकों की सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया है, जिन्होंने खुलेआम पार्टी के व्हिप के खिलाफ काम किया।’’

राज्यसभा चुनाव में बीजद के आठ विधायकों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ की थी, जिसके परिणामस्वरूप 16 मार्च को हुए द्विवार्षिक चुनावों में उनकी जीत हुई।

मल्लिक ने कहा, ‘‘चूंकि आठों विधायकों ने जानबूझकर पार्टी से नाता तोड़ लिया है, इसलिए कानून के प्रावधानों के अनुसार उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। इन विधायकों को या तो अपने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए या फिर उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए।’’

पार्टी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून का हवाला दिया और तर्क दिया कि ‘क्रॉस वोटिंग’ करना पार्टी विरोधी गतिविधियों के जरिये पार्टी की सदस्यता को ‘‘स्वेच्छा से छोड़ने’’ के बराबर है।

राज्यसभा चुनाव में बीजद के आठ और कांग्रेस के तीन समेत कुल 11 विधायकों ने ‘क्रॉस वोटिंग’ की थी, जिसके बाद दोनों पार्टियां उन्हें अयोग्य ठहराए जाने की मांग कर रही हैं। दोनों पार्टियों ने दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया है।

निलंबित करने से पहले, बीजद ने छह विधायकों- नब किशोर मल्लिक (जयदेव), सौविक बिस्वाल (चौद्वार-कटक), सुबासिनी जेना (बस्ता), रमाकांत भोई (तिर्तोल), चक्रमणि कन्हार (बालीगुडा) और देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) को ‘‘कारण बताओ नोटिस’’ जारी किया था। बाद में, बीजद की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के निर्णय पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। अन्य दो अरविंद महापात्र (पटकुरा) और सनातन महाकुड (चंपुआ) को राज्यसभा चुनाव से पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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