भाजपा सरकार दिवाला संहिता में संशोधन उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर रही: कांग्रेस सांसद

भाजपा सरकार दिवाला संहिता में संशोधन उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर रही: कांग्रेस सांसद

भाजपा सरकार दिवाला संहिता में संशोधन उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर रही: कांग्रेस सांसद
Modified Date: March 25, 2026 / 07:09 pm IST
Published Date: March 25, 2026 7:09 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) कांग्रेस के एक सांसद ने बुधवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई है तथा इससे छोटे उद्यम एवं व्यापारी प्रभावित होंगे।

कांग्रेस सांसद भजनलाल जाटव ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि इसे दिवाला प्रणाली को और जटिल तथा असमान बनाने के लिए लाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस आईबीसी (दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016) को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान के लिए बनाया गया था, यह संशोधन कहीं न कहीं उस मूल भावना को कमजोर करता है।’’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का सबसे नकारात्मक बड़ा प्रभाव छोटे उद्यमों और व्यापारियों पर पड़ेगा तथा यह छोटे व्यवसायों के लिए संकट पैदा करेगा।

उन्होंने कहा कि विधेयक में केंद्र सरकार को अधिकाधिक शक्तियां देने का प्रावधान बहुत चिंताजनक है, जो संसद की भूमिका को कमजोर करता है।

उन्होंने मामलों के वर्षों तक लंबित रहने का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) की स्थिति का हवाला दिया और कहा कि इसमें मात्र 63 पीठ हैं और उनमें करीब 33 न्यायाधीश नियुक्त किये गए हैं।

कांग्रेस सांसद ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ कंपनियों पर करोड़ों रुपये का कर्ज था लेकिन उनसे नाममात्र ही वसूली की गई।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अमरा राम ने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान 2016 में दिवाला कानून लाये जाने के बाद, एक दर्जन से अधिक कारोबारी बैंकों का पैसा लेकर भाग गए, लेकिन उन्हें आज तक वापस नहीं लाया गया।

उन्होंने दावा किया, ‘‘बैंकों में जमा राशि का 93 प्रतिशत हिस्सा आम लोगों का है। बैंकों में केवल सात प्रतिशत पैसा ही बड़ी कंपनियों का है, लेकिन वे 75 प्रतिशत रिण लेती हैं। और यह अक्सर डिफॉल्ट हो जाता है।’’

माकपा सांसद ने कहा, ‘‘2014 से 2024 तक, सरकार ने 15 लाख करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाल दिये।’’

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनके एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने जिन बड़ी कंपनियों का 15 लाख करोड़ रुपये माफ करने की जानकारी दी, उनके नामों का खुलासा करने से इनकार कर दिया लेकिन किसान यदि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के तहत लिए गए ऋण नहीं चुकाते हैं तो उनके नाम अखबारों में प्रकाशित कर दिये जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सहारा इंडिया मामले में उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि कंपनी की संपत्ति जब्त कर लोगों का पैसा चुकाया जाए, लेकिन अब तक 10 प्रतिशत लोगों को भी अपना पैसा नहीं मिला है।

भाजपा के पी. पी. चौधरी ने कहा कि वाद-पूर्व मध्यस्थता को बढ़ावा देने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक में इससे संबंधित प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रस्तावित कानून के लागू होने पर छोटे उद्यमियों को कर्ज मिलना मुश्किल हो जाएगा, रोजगार घटेगा और पलायन की समस्या बढ़ेगी।

समाजवादी पार्टी के नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि एनसीएलटी को 14 दिन के अंदर मामला स्वीकार करना पड़ेगा और इस तरह अब समझौते का रास्ता ही बंद कर दिया गया है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एम. गुरुमूर्ति ने विधेयक का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए एनसीएलटी की क्षमता को बढ़ाने के लिए क्या उपाय किये गए हैं।

आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि पिछले 12 साल में कई लोग धोखाधड़ी कर विदेश भाग गए, लेकिन ‘डिफॉल्टर’ कारोबारियों को भागने से रोकने के लिए इस विधेयक में क्या प्रावधान किये गए हैं।

राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान ने विधेयक का समर्थन करते हुए एनसीएलटी की अतिरिक्त पीठ गठित करने की जरूरत बताई, ताकि मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो सके।

भाषा सुभाष वैभव

वैभव


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