राजस्थान की भाजपा सरकार निकाय, पंचायत चुनावों में देरी कर लोकतंत्र को कर रही है कमजोर: पायलट

राजस्थान की भाजपा सरकार निकाय, पंचायत चुनावों में देरी कर लोकतंत्र को कर रही है कमजोर: पायलट

राजस्थान की भाजपा सरकार निकाय, पंचायत चुनावों में देरी कर लोकतंत्र को कर रही है कमजोर: पायलट
Modified Date: April 13, 2026 / 06:26 pm IST
Published Date: April 13, 2026 6:26 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

जयपुर, 13 अप्रैल (भाषा) वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सोमवार को आरोप लगाया कि राजस्थान की भाजपा सरकार स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में देरी कर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह कदम “हार के डर” से उठाया गया है।

पायलट ने कहा कि कई राज्यों में स्थानीय चुनावों में देरी चिंता का विषय है और राजस्थान की स्थिति लोकतांत्रिक जवाबदेही से बचने की “संगठित कोशिश” को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “शहरों और गांवों में प्रशासक तो हैं, लेकिन वे लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल नहीं कर पा रहे हैं। चुनाव जल्द कराने की व्यापक मांग है।”

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आने के बाद छात्र संघ, नगर निकाय और पंचायत संस्थाओं के चुनाव नहीं कराये गये।

उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी लगातार मांग कर रही है कि चुनाव जल्द कराए जायें। अदालत के निर्देश और 15 अप्रैल की समयसीमा के बावजूद चुनाव नहीं कराये गये। यह स्पष्ट नहीं है कि निर्वाचन आयोग और सरकार क्या कर रहे हैं।”

पायलट ने कहा कि आम धारणा है कि भाजपा सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती क्योंकि परिणाम उनके पक्ष में नहीं होंगे, इसी डर से बार-बार बहाने बनाकर चुनाव टाले जा रहे हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार को भी निशाना बनाते हुए कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) राजस्थान में “लगभग बंद” हो गई है और देशभर में कमजोर कर दी गई है।

उन्होंने कहा, “जिन गांवों में मैं गया, वहां मनरेगा का काम लगभग ठप है। हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि योजनाओं का नाम बदलना उन्हें कमजोर करने का बहाना है। जब कांग्रेस सत्ता में थी, लाखों लोग लाभान्वित हुए, लेकिन आज यह योजना लगभग निष्क्रिय है।”

पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त धन आवंटित नहीं कर रही है और वास्तविक शासन की बजाय “विज्ञापनों के जरिए प्रबंधन” पर अधिक ध्यान दे रही है।

राज्य सरकार के रोजगार दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “पहले बजट में चार लाख नौकरियों का वादा किया गया था। अब ढाई साल बीत चुके हैं तो वास्तव में कितने लोगों को रोजगार मिला है?”

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार


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