भाजपा ‘दंगाइयों की पार्टी’, रामनवमी रैलियों में हिंसा भड़काने की जिम्मेदार : अभिषेक बनर्जी

भाजपा ‘दंगाइयों की पार्टी’, रामनवमी रैलियों में हिंसा भड़काने की जिम्मेदार : अभिषेक बनर्जी

भाजपा ‘दंगाइयों की पार्टी’, रामनवमी रैलियों में हिंसा भड़काने की जिम्मेदार : अभिषेक बनर्जी
Modified Date: March 28, 2026 / 09:39 pm IST
Published Date: March 28, 2026 9:39 pm IST

कोलकाता, 28 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ‘‘दंगाइयों की पार्टी’’ करार दिया और उसपर राज्य में रामनवमी की रैलियों के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप भी लगाया।

पार्टी के दो नंबर के नेता बनर्जी ने बीरभूम जिले के लाभपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल के लोग पारंपरिक रूप से सभी त्योहारों को सौहार्दपूर्वक मनाते आए हैं।

क्या आपने दुर्गा पूजा, काली पूजा, जगद्धात्री पूजा, ईद, छठ पूजा, क्रिसमस या जैन समुदाय द्वारा निकाली जाने वाली शोभायात्रा के दौरान दंगे या झड़प की किसी घटना के बारे में सुना है?’

पार्टी महासचिव ने कहा, ‘‘तो फिर रामनवमी जैसे पवित्र अवसर का उपयोग वे (भाजपा) हिंसा और अराजकता पैदा करने के लिए क्यों कर रहे हैं?’’

चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को उस वक्त तनाव फैल गया, जब रामनवमी जुलूस के दौरान झड़पें हुईं। कई स्थानों से पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं की खबर आईं।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रघुनाथगंज और जंगीपुर क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अब तक हिंसा के संबंध में 30 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद ने बिना किसी घटना का उल्लेख किए आरोप लगाया कि भाजपा का मतलब ‘‘उपद्रवी’’ (होना) है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और इसके सहयोगी संगठन रामनवमी के जुलूसों में गुंडों को लाते हैं, जो तलवारें लहराते हैं और सार्वजनिक रूप से शराब पीते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ भाजपा और उसके अनुषंगी संगठनों से जुड़े रामनवमी के जुलूसों के दौरान ही हिंसा की खबर क्यों आती है? बंगाल में त्योहारों के अवसर पर सद्भाव और सौहार्द की परंपरा है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या के लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को खारिज कर चुके हैं, यद्यपि उसने धर्म आधारित राजनीति की थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि भाजपा को बंगाल और अन्य चुनावी राज्यों में भी यही नतीजा भुगतना होगा।

बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने राज्य के लोगों को “एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया) की कतारों में खड़ा होने के लिए मजबूर करके” और “लाखों असली मतदाताओं के नाम हटाकर” परेशानी में डाल दिया है।

उन्होंने सवाल किया, “भाजपा नेता एसआईआर के नाम पर बंगाल के लोगों को धमकी क्यों दे रहे हैं?’’

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह चुनाव केवल ममता बनर्जी को चौथी बार सत्ता में वापस लाने के बारे में नहीं है, बल्कि भाजपा की सीट की संख्या को 50 से भी नीचे सीमित करने के लिए भी है।

उन्होंने कहा, ‘‘याद रखें, वे जहां भी जीते, सबसे ज़्यादा नुकसान गरीबों को ही उठाना पड़ता है। वे धर्म की राजनीति करते हैं, हम काम, भोजन, वस्त्र और विकास की राजनीति में विश्वास करते हैं। इसलिए, भारी बहुमत से हमारे उम्मीदवारों को वोट दें।’’

तृणमूल महासचिव ने दावा किया कि असम, बिहार और त्रिपुरा की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)ने महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और समाज के अन्य वर्गों के लिए विकास संबंधी पहल शुरू नहीं की, जैसा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार ने किया है।

केंद्र पर बंगाल में गरीबों के लिए आवास योजनाओं के लिए एक पैसा भी मंजूर न करने का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा, “हालांकि उन्होंने (केंद्र सरकार ने) 10 पैसे भी मंजूर नहीं किए लेकिन हम अगले छह महीनों में राज्य के हर व्यक्ति के सिर पर छत सुनिश्चित करेंगे।”

उन्होंने कहा कि अगर चुनाव के बाद तृणमूल सत्ता में वापसी करती है तो स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम ‘दुआरे स्वास्थ्य’भी साकार हो जाएगा।

बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘उनके (भाजपा के) उम्मीदवार घर-घर जाकर लोगों की दाढ़ी बना रहे हैं और शाकाहारी व्यंजन परोस रहे हैं। चूंकि चुनाव के बाद वे नजर नहीं आएंगे, इसलिए अभी से अपने सारे घरेलू काम उनसे करवा लें, यहां तक ​​कि बाल कटवाने का काम भी।’’

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


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