भाजपा ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज की शैली पर सवाल उठाया
भाजपा ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज की शैली पर सवाल उठाया
(फाइल फोटो के साथ)
चाईबासा, 28 जून (भाषा) झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के कामकाज के तौर-तरीके पर रविवार को सवाल उठाते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने पिछले 10 सालों में जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (डीएमएफटी) निधि का कथित तौर पर सही इस्तेमाल न कर पाने को लेकर उसकी आलोचना की।
पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी ने पश्चिम सिंहभूम ज़िले में प्रेसवार्ता में कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने डीएमएफटी इसलिए बनाया था, ताकि खदानों से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी और सड़क जैसे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध किया जा सके एवं विकास हो।
मरांडी ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में डीएमएफटी मद के तहत जिले को 3000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली, लेकिन राज्य सरकार और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के उदासीन रवैये के कारण इसका सही ढंग से उपयोग नहीं हो सका।
भाजपा नेता मरांडी ने दावा किया कि आज ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत बहुत खराब है; समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलती और रोजगार के मौकों की कमी के कारण युवा और महिलाएं पलायन करने को मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विकास के दावों को ‘ढकोसला’ करार देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि झामुमो नेता राज्य में निवेश लाने का दावा तो करते हैं, लेकिन वह मौजूदा उद्योगों को बचाने में नाकाम रहे हैं।
उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम के झिंकपानी ब्लॉक में मौजूद एक सीमेंट प्लांट का ज़िक्र किया, जो या तो बंद हो चुका है या बंद होने की कगार पर है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि शाह आयोग की जांच के बाद बंद हुई लौह अयस्क की खदानों में पड़ोसी राज्य ओडिशा में तो काम फिर से शुरू हो गया है, लेकिन झारखंड में राज्य सरकार की गलत नीतियों की वजह से ऐसा नहीं हो पाया, जिससे बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ।
न्यायमूर्ति एमबी शाह आयोग केंद्र सरकार द्वारा 2010 में बनाया गया था, जिसे गोवा, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में लौह अयस्क और मैंगनीज के बड़े पैमाने पर अवैध खनन की जांच करने के लिए गठित किया गया था।
भाषा
राजकुमार सुरेश
सुरेश

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