पश्चिम बंगाल चुनाव जीतेगी भाजपा, हर घुसपैठिये को बाहर निकालेंगे हम: अमित शाह
पश्चिम बंगाल चुनाव जीतेगी भाजपा, हर घुसपैठिये को बाहर निकालेंगे हम: अमित शाह
(तस्वीरों के साथ)
अररिया (बिहार), 26 फरवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को विश्वास जताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतेगी और राज्य से ‘‘हर एक घुसपैठिये’’ को बाहर निकालेगी।
उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय बदलाव से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में पश्चिम बंगाल शामिल है।
शाह ने यह बात बिहार के अररिया जिले में कही, जहां उन्होंने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 175 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण किया और दो नए सीमा चौकियों को राष्ट्र को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि देश से हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालना भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ये लोग न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि गरीबों के लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर उनके प्रभाव को भी कम करते हैं।’’
शाह ने कहा कि बड़े पैमाने पर घुसपैठ से सीमावर्ती इलाकों में अतिक्रमण भी बढ़ता है और इसे हटाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘घुसपैठ जनसांख्यिकीय बदलाव का खतरा भी पैदा करती है, जो किसी क्षेत्र की संस्कृति और यहां तक कि उसकी भौगोलिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है।’’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने जनसांख्यिकीय बदलाव का अध्ययन करने और सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर स्थिति सुधारने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जनसांख्यिकीय बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं। पश्चिम बंगाल में जल्द चुनाव होने हैं। हमें विश्वास है कि भाजपा चुनाव जीतेगी और हर भाजपा सरकार की प्राथमिकता घुसपैठियों को बाहर निकालना है।’’
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है।
शाह ने कहा कि घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत बिहार के सीमांचल क्षेत्र से होगी, जहां वे कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव के दौरान चार दिन तक रुके थे। उन्होंने राज्य की जनता को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को प्रचंड जनादेश देने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की आलोचना के बावजूद भाजपा ने बिहार चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा,‘‘घुसपैठियों को बाहर निकालना बिहार में हमारे एजेंडे का उतना ही हिस्सा है जितना लोगों का कल्याण। मैं राज्य और देश की जनता से वादा करता हूं कि अगले जनादेश के लिए जाने से पहले हर घुसपैठिये को बाहर निकाल दिया जाएगा।’’
शाह ने कहा कि घुसपैठ रोकने में एसएसबी की अहम भूमिका है।
शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ‘‘मुसलमानों को निशाना बनाने’’ के समान है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय की बड़ी आबादी है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा, ‘‘हमें पहले से पता था कि गृह मंत्री सीमांचल दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखे हुए हैं। लेकिन उन्हें राज्य के लोगों को बदनाम नहीं करना चाहिए, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी के दौरान भारत के प्रति अपनी निष्ठा साबित की थी।’’
भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक संदीप सौरव ने कहा, ‘‘जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में एक भी घुसपैठिया चिन्हित नहीं हुआ तो अमित शाह अब भी घुसपैठ का राग क्यों अलाप रहे हैं? वह केवल मुसलमानों का अपमान करना चाहते हैं।’’
शाह ने कहा कि जहां सीमा पर उचित बाड़बंदी है और पड़ोसी देश से संबंध मैत्रीपूर्ण हैं, वहां सीमा की सुरक्षा आसान होती है, लेकिन जहां सीमा खुली या संवेदनशील है, वहां अलग रणनीति की आवश्यकता है।
उन्होंने एसएसबी और संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से ऐसे क्षेत्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों को सीमावर्ती गांवों के निवासियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने चाहिए, ताकि तस्करी और मादक पदार्थों के कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिल सके।
गृह मंत्री ने कहा कि जवानों के पड़ोसी देश के सुरक्षा बलों के साथ भी सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह का कहना था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) आवास योजना और सीएपीएफ आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाएं लागू हैं तथा आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था है और कार्य के दौरान दिव्यांग होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि भी बढ़ाई गई है।
गृहमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने कहा, ‘‘वीर सावरकर निडर देशभक्त ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट लेखक भी थे। उनके लेखन ने 1857 के विद्रोह को केवल ‘सिपाही विद्रोह’ नहीं बल्कि देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में स्थापित किया। उन्होंने अस्पृश्यता जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई और जीवनभर राष्ट्रवाद को सुदृढ़ करने का कार्य किया।’’
भाषा कैलाश
राजकुमार
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