ब्रिक्स सदस्य देशों ने वैश्विक मादक पदार्थ समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया

ब्रिक्स सदस्य देशों ने वैश्विक मादक पदार्थ समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया

ब्रिक्स सदस्य देशों ने वैश्विक मादक पदार्थ समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया
Modified Date: July 6, 2026 / 04:08 pm IST
Published Date: July 6, 2026 4:08 pm IST

गुवाहाटी, छह जुलाई (भाषा) ब्रिक्स सदस्य देशों ने सोमवार को मादक पदार्थों के खतरे से सामूहिक रूप से निपटने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इसे एक ऐसा ‘अंतरराष्ट्रीय खतरा’ बताया, जिससे मुकाबला करने के लिए देशों के बीच बेहतर सहयोग और बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करने की जरूरत है।

यहां शुरू हुई ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ-रोधी एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेते हुए प्रतिनिधियों ने संगठन की सहयोग की परंपरा को भी रेखांकित किया और इसे और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी- सिंथेटिक मादक पदार्थों और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के दुरुपयोग तथा अवैध तस्करी पर रोक, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त अभियानों के बेहतर समन्वय को मजबूत करना, तथा क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना।

बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए नयी दिल्ली में इथियोपिया दूतावास के उप-राजदूत नेबियू टेडला ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या अब एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है और ब्रिक्स जैसे मंच सहयोग, सूचना के आदान-प्रदान तथा समन्वित प्रयासों के जरिए इससे निपटने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे देश को भी, अन्य देशों की तरह, इस क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों से निपटने के अपने अनुभव साझा करेंगे। हम अन्य देशों से भी सीखेंगे और उम्मीद करते हैं कि इन सत्रों से सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां सामने आएंगी।”

रूस के मादक पदार्थ-रोधी विभाग के प्रमुख इवान गोर्बुनोव ने भी इस समस्या से निपटने के लिए अनुभवों के आदान-प्रदान के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “हम अपने अनुभव साझा करेंगे और अपने देश में मादक पदार्थों की स्थिति के बारे में बताएंगे। हम अन्य देशों के अनुभव भी सुनेंगे।”

ब्रिक्स की शुरुआत ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। वर्ष 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए, जबकि वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का सदस्य बन गया।

भाषा तान्या प्रशांत

प्रशांत


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