सीएपीएफ विधेयक उच्चतम न्यायालय के फैसले पर हमला : कांग्रेस नेता माकन

सीएपीएफ विधेयक उच्चतम न्यायालय के फैसले पर हमला : कांग्रेस नेता माकन

सीएपीएफ विधेयक उच्चतम न्यायालय के फैसले पर हमला : कांग्रेस नेता माकन
Modified Date: March 25, 2026 / 10:49 pm IST
Published Date: March 25, 2026 10:49 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस सदस्य अजय माकन ने कहा कि सीएपीएफ विधेयक प्रशासनिक सुधार नहीं बल्कि उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले पर हमला है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर सशस्त्र बलों के कर्मियों के भविष्य और पदोन्नति के अवसरों को बाधित करने का आरोप लगाया।

सरकार ने विपक्ष के विरोध के बीच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश किया और सदन ने इस संबंध में विपक्ष के नोटिस को ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

बाद में विधेयक पर हुई बहस में भाग लेते हुए माकन ने कहा, ‘यह विधेयक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले पर हमला है।

यह विधेयक पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए अलग-अलग सेवा नियम व्यवस्था के मौजूदा तंत्र की जगह, विभिन्न सीएपीएफ बलों में कर्मियों को नियंत्रित करने वाला एक एकीकृत कानूनी ढांचा बनाने का प्रावधान करता है।

कांग्रेस नेता माकन ने सरकार पर सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किए जाने वाले जवानों के भविष्य और पदोन्नति को रोकने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र अर्धसैनिक बलों की वजह से ही जीवित है, क्योंकि चुनावों के दौरान उनकी तैनाती की जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में अर्धसैनिक बलों के 529 जवानों ने अपनी जान गंवाई है।

माकन ने कहा कि आज हम उनकी पदोन्नति रोक रहे हैं जो शर्मनाक है। उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के विभिन्न आदेशों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि कई बार अदालतों ने कहा है कि इन जवानों को न्याय नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन करते हुए सीएपीएफ कर्मियों को लंबे समय तक एक ही पद पर नहीं रखा जाना चाहिए, तो सरकार इसे कानून के जरिए क्यों बदलने की कोशिश कर रही है।

माकन ने कहा कि 2021 से 2025 के बीच अर्धसैनिक बलों के 749 जवानों ने आत्महत्या कर ली जबकि 46,000 कर्मियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है, 9,532 कर्मियों ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि ये युवा लोग हैं जिन्हें लगा कि उनके पास आगे बढ़ने के अवसर नहीं हैं, हम उन्हें कैसे प्रेरित कर रहे हैं?

कांग्रेस नेता ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह का सदन में उपस्थित नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए था।

कांग्रेस सदस्य का प्रतिवाद करते हुए भाजपा के महेंद्र भट्ट ने कहा कि यह विधेयक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा और पारदर्शिता बढ़ाएगा।

उनके अनुसार, विधेयक में मानव संसाधन प्रबंधन में सुधार पर जोर दिया गया है, जिससे सीएपीएफ कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।

भट्ट ने तर्क दिया कि विधेयक पांचों केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) – सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के कर्मियों के लिए कानूनी ढांचे में सामंजस्य स्थापित करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए।

वाईएसआरसीपी के गोला बाबूराव ने आत्महत्या जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए सीएपीएफ के भीतर ‘संकट’ को रेखांकित किया और सभी कर्मियों के लिए अनिवार्य मनोवैज्ञानिक जांच सहित अन्य उपायों की मांग की।

इससे पहले कांग्रेस नेता अजय माकन ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय के छह फैसलों का हवाला दिया और विधेयक के कानून बन जाने के बाद इसके कार्यान्वयन के वित्तीय बोझ को रेखांकित किया।

इसी पार्टी के विवेक तन्खा ने तर्क दिया कि इस विधेयक से लगभग 13,000 सेवा अधिकारियों के संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकारों के ख़त्म होने का जोखिम है।

द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय के उन फैसलों को रद्द करने के लिए बनाया गया था, जिन्होंने अर्धसैनिक बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति को कम कर दिया था।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने तर्क दिया कि इस विधेयक में ‘विधायी दक्षता’’ का स्पष्ट अभाव है।

बाद में सदन ने विपक्ष के नोटिस को खारिज करते हुए इस विधेयक को पेश करने की ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

भाषा अविनाश रंजन

रंजन


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