कार्नी राष्ट्र हित को दे रहे तरजीह, जिससे भारत से संबंधों के लिए बन रहा अनुकूल माहौल: विशेषज्ञ
कार्नी राष्ट्र हित को दे रहे तरजीह, जिससे भारत से संबंधों के लिए बन रहा अनुकूल माहौल: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) कनाडा में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने सीमापारीय अपराध से भारत के अब जुड़े नहीं होने संबंधी देश के हालिया आकलन को द्विपक्षीय संबंधों में ‘‘वास्तव में तनाव कम होने का संकेत’’ बताया।
बिसारिया ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों के नवीनीकरण के लिए ‘परिस्थितियां अनुकूल हैं’।
जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे।
बिसारिया ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि यह बदलाव व्यापक राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को पटरी से उतरने दिए बिना, सुरक्षा मुद्दों को परिपक्वता से संभालने के लिए एक ठोस प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देश इस सुरक्षा चुनौती से अत्यंत परिपक्वता के साथ निपट रहे हैं। दोनों देशों को यह एहसास है कि यह सुरक्षा चुनौती संबंधों के लिये बड़ा झटका थी, जिसके कारण रिश्तों में गर्माहट नहीं रही… अब प्रयास यही है कि इससे कुछ हद तक परिपक्वता के साथ निपटा जाए, ताकि यह राजनीतिक समस्या में न बदल जाए।’’
बिसारिया ने सुरक्षा संबंधी मुद्दों को ‘एक दायरे में सीमित रखने’ और सहयोग के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित किए बिना उनका प्रबंधन करने के प्रयासों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की इस महीने की शुरुआत में कनाडा यात्रा का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, हालांकि भविष्य में सुरक्षा संबंधी मुद्दों को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
बिसारिया ने कहा कि अब इस रिश्ते को ऐसी संभावित स्थितियों से निपटने के लिए ‘मजबूत’ बनाया जा रहा है, ठीक उसी तरह जैसे भारत अमेरिका या ब्रिटेन के साथ कभी-कभार होने वाले टकरावों से निपटता है।
कनाडा में भारत के पूर्व उच्चायुक्त ने कहा कि अतीत से प्रमुख अंतर यह है कि अब राजनीतिक संबंध आर्थिक जुड़ाव को बाधित करने के बजाय सकारात्मक गति प्रदान कर रहे हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और पोर्टफोलियो प्रवाह के माध्यम से भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का कनाडाई निवेश मजबूत बना हुआ है, और पेंशन फंड और निवेश फर्म भारत की विकास गाथा में अपना मजबूत विश्वास दिखा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा मुंबई में उद्योगपतियों की बैठकों के साथ शुरू हुई। वह अपनी भारत यात्रा के दौरान दो मार्च को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्ता भी करेंगे।
बिसारिया ने तनावपूर्ण संबंधों में आए इस निर्णायक मोड़ का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए भू-राजनीतिक बदलावों को दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इस स्थिति ने संबंधों को गति प्रदान की है और इसे सामान्य स्थिति में लाने में पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से प्रगति हो रही है।’’
उन्होंने रेखांकित किया कि कनाडा की अब विदेश नीति प्रवासियों से प्रेरित होने के बजाय व्यावहारिक राष्ट्रीय हितों की ओर बढ़ रही है, जो एक अहम बदलाव है।
बिसारिया ने कहा, ‘‘ यह बदलाव भू-राजनीति के साथ-साथ कनाडा के अपने हितों की व्यावहारिक समझ के कारण हुआ है… भारत इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।’’ उनका आकलन है कि यह परिवर्तन वर्तमान प्रशासन के बाद भी जारी रह सकता है।
बिसारिया ने आर्थिक मोर्चे पर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, ‘‘परिस्थिति पूरी तरह अनुकूल है… यह बातचीत संभवतः इस वर्ष तेजी से आगे बढ़ेगी, और हमें उम्मीद है कि हम किसी समझौते पर पहुंच सकेंगे।’’
कार्नी की यात्रा का एक अहम पहलू तीन अरब अमेरिकी डॉलर के दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते का पटरी पर आना हो सकता है। यूरेनियम के अलावा, खनन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी सहयोग की उम्मीद है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने भी व्यापार को लेकर इसी तरह की उम्मीद जताई।
श्रीवास्तव ने रेखांकित किया कि भारत कनाडा को दवाइयां, रत्न और आभूषण, वस्त्र और मशीनरी निर्यात करता है, जबकि दालें, लकड़ी, लुगदी, कागज और खनन उत्पाद आयात करता है। उन्होंने कहा, ‘‘ ये वे क्षेत्र हैं, जहां आयात से घरेलू उद्योग को कोई खतरा नहीं है।’’
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप

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