केंद्रीय सूचना आयोग ने ‘केरलम’ प्रस्ताव के संबंध में सूचना नहीं देने पर मांगा स्पष्टीकरण

केंद्रीय सूचना आयोग ने ‘केरलम’ प्रस्ताव के संबंध में सूचना नहीं देने पर मांगा स्पष्टीकरण

केंद्रीय सूचना आयोग ने ‘केरलम’ प्रस्ताव के संबंध में सूचना नहीं देने पर मांगा स्पष्टीकरण
Modified Date: June 23, 2026 / 09:26 pm IST
Published Date: June 23, 2026 9:26 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने केरल का नाम बदलकर ‘‘केरलम’’ करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर जवाब की प्रति नहीं देने के लिए गृह मंत्रालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) से स्पष्टीकरण मांगा है। सीआईसी ने कहा कि मंत्रालय ने आरटीआई कानून के तहत छूट का जो हवाला दिया वह ‘‘त्रुटिपूर्ण’’ था।

इस साल की शुरुआत में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल सरकार के उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी जिसमें राज्य का नाम बदलकर ‘‘केरलम’’ करने की बात कही गई थी। अब इस बदलाव को लागू करने के लिए संसद की मंजूरी की जरूरत है।

आरटीआई आवेदक ने राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव के संबंध में अगस्त 2023 और जून 2024 में केरल विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों की प्रतियां मांगी थीं। इसके साथ ही उन्होंने अगस्त 2023 के प्रस्ताव के संबंध में गृह मंत्रालय के जवाब की प्रति भी मांगी थी।

आदेश के अनुसार, सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन का कोई जवाब न मिलने पर अपीलकर्ता ने सीआईसी का रुख किया।

सुनवाई के दौरान, गृह मंत्रालय के सीपीआईओ ने बताया कि आरटीआई कानून की धारा 8(1)(ई) के तहत 16 दिसंबर, 2024 को आवेदन का जवाब दे दिया गया था।

जब मंत्रालय से सूचना न देने के लिए छूट की वजह बताने को कहा गया, तो उसने दलील दी कि संबंधित दस्तावेज गृह मंत्रालय और संबंधित राज्य सरकार के बीच हुए पत्राचार से जुड़े हैं तथा इस विषय पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि संबंधित दस्तावेज को ‘‘गोपनीय’’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

इस पर मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने टिप्पणी की कि अगस्त 2023 और जून 2024 के प्रस्तावों की प्रतियां मांगे जाने का मामला प्रथम दृष्टया संबंधित राज्य सरकार से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।

आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि अपीलकर्ता ने उन दस्तावेजों का हवाला दिया था, जो संबंधित राज्य विधानसभा की वेबसाइट पर आंशिक रूप से उपलब्ध हैं।

हालांकि, अगस्त 2023 के प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब की प्रति मांगे जाने संबंधी आवेदक के अनुरोध पर आयोग ने कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ई) के तहत सूचना देने से इनकार करना ‘‘त्रुटिपूर्ण’’ और ‘‘अनुचित’’ था।

आयोग ने कहा कि सुनवाई के दौरान सीपीआईओ आरटीआई कानून की धारा 19(5) के तहत अपेक्षित तरीके से इस छूट को लागू करने का औचित्य साबित करने में असमर्थ रहे।

मुख्य सूचना आयुक्त ने सीपीआईओ को आरटीआई आवेदन के बिंदु संख्या दो के संबंध में, जो केरल सरकार के प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय के जवाब से जुड़ा है, दो सप्ताह के भीतर अपीलकर्ता को संशोधित उत्तर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश


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