केंद्र गैर-भाजपा शासित राज्यों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को ‘कठपुतली’ बना रहा: खरगे

केंद्र गैर-भाजपा शासित राज्यों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को ‘कठपुतली’ बना रहा: खरगे

केंद्र गैर-भाजपा शासित राज्यों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को ‘कठपुतली’ बना रहा: खरगे
Modified Date: January 24, 2026 / 08:15 pm IST
Published Date: January 24, 2026 8:15 pm IST

(फोटो के साथ)

हुबली (कर्नाटक), 24 जनवरी (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर शनिवार को आरोप लगाया कि वह कांग्रेस शासित और अन्य गैर-भाजपा शासित राज्य सरकारों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को ‘कठपुतली’ बना रही है।

आगामी सभी चुनावों में भाजपा के खिलाफ मतदान करने का आह्वान करते हुए खरगे ने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर निरंकुश शासन स्थापित हो सकता है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने मनरेगा को ‘रद्द’ करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस सरकारों ने ‘अधिकार-आधारित’ कानून बनाए थे, लेकिन मोदी सरकार ऐसे कानून ला रही है जो लोगों के अधिकारों को सीमित करते हैं।

खरगे ने ‘स्लम डेवलपमेंट बोर्ड’ की स्वर्ण जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री आवास योजना ‘सभी के लिए आश्रय’ के तहत राज्यभर में मुख्यमंत्री अनुदान से निर्मित 1,80,253 घरों में से 42,345 घरों के लोकार्पण और मकान आवंटन पत्र या स्वामित्व विलेख वितरण के लिए किया गया था।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और राज्य सरकार के कई मंत्री उपस्थित थे। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्यपालों को निर्देश जारी कर रहे हैं।

खरगे ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री कार्यालय के माध्यम से राज्यपालों को सीधे निर्देश देती है कि वे सिद्धरमैया या कांग्रेस सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषणों को (राज्य विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान) न पढ़ें। यह स्थिति केवल कर्नाटक में ही नहीं है, तमिलनाडु, केरल और जहां भी कांग्रेस या गैर-भाजपा सरकारें सत्ता में हैं, वहां राज्यपालों द्वारा गड़बड़ी पैदा की जा रही है।’’

जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्यपाल निजी तौर पर यह स्वीकार करते हैं कि उन्हें ‘ऊपर से’ निर्देश मिलते हैं।

भाषा संतोष देवेंद्र

देवेंद्र


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